इंदौर। शादी के मंडप से उठकर पति के साथ नई जिंदगी की शुरुआत करने मेघालय की वादियों में पहुंची सोनम रघुवंशी को शायद अंदाज़ा नहीं था कि कानून के हाथ उसकी बनाई खौफनाक पटकथा से कहीं ज्यादा लंबे हैं। साल 2025 के चर्चित इंदौर ‘हनीमून कांड’ में सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय सरकार की याचिका स्वीकार करते हुए मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द कर दी है। शीर्ष अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी पत्नी को तीन सप्ताह के भीतर पुलिस के सामने सरेंडर करने का आदेश सुनाया है। अदालत का यह फैसला आते ही इंदौर में रह रहे मृतक कारोबारी राजा रघुवंशी के घर लंबे समय बाद राहत और न्याय की नई किरण दिखी। फैसले की खबर मिलते ही राजा के पिता अशोक रघुवंशी अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए और बेटे की तस्वीर सीने से लगाकर रो पड़े।
एक साल से अधिक समय से न्याय की आस लगाए बैठा पीड़ित परिवार सोनम की जमानत के बाद से ही खौफ के साए में जी रहा था। राजा की मां उमा रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भावुक लहजे में कहा कि ऐसी निर्मम महिला का जेल से बाहर रहना पूरे समाज और उनके परिवार की सुरक्षा के लिए खतरा था। वहीं, मृतक के बड़े भाई विपिन रघुवंशी ने इस फैसले को असत्य पर सत्य की जीत बताते हुए कहा कि बाहर रहकर सोनम सबूतों से छेड़छाड़ कर सकती थी। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में की जाए ताकि दोषी को जल्द से जल्द कड़ी से कड़ी सजा मिल सके।
उल्लेखनीय है कि शादी के तुरंत बाद मेघालय घूमने गए राजा और सोनम संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गए थे, जिसके बाद ईस्ट खासी हिल्स (सोहरा) में एक गहरी खाई से राजा का गोलियों से छलनी शव बरामद हुआ था। पुलिस तफ्तीश में जो सच निकलकर सामने आया, उसने सभी को हैरान कर दिया। सोनम ने अपने प्रेमी राज कुशवाह और तीन भाड़े के शूटरों के साथ मिलकर अपने ही पति की खौफनाक हत्या की साजिश रची थी। 9 जून 2025 को यूपी के गाजीपुर से गिरफ्तारी के बाद वह शिलांग जेल में बंद थी, लेकिन हाईकोर्ट से बेल मिलने के बाद से बाहर आ गई थी। आज भी बेटे की याद में तड़प रहे पिता अशोक रघुवंशी कहते हैं कि एक संतान को पाल-पोसकर बड़ा करने का दर्द सिर्फ माता-पिता ही समझ सकते हैं, और सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश ने उनके टूटते हौसले को फिर से जिंदा कर दिया है।
