धमतरी। शहर के हटकेशर वार्ड स्थित नागसागर तालाब के समीप एक संकरी गली में वर्षों पुरानी ऐतिहासिक धरोहर खुले आसमान के नीचे अपनी पहचान की लड़ाई लड़ रही है। धूप, बारिश और मौसम की मार झेल चुकी यह प्राचीन संरचना आज भी राहगीरों के लिए कौतूहल और विस्मय का केंद्र बनी हुई है। विडंबना यह है कि पीढ़ियों से मौजूद इस पुरातात्विक संपदा के वास्तविक कालखंड और महत्व को लेकर आज तक कोई आधिकारिक शोध नहीं हुआ और न ही इसके संरक्षण के लिए कोई ठोस प्रशासनिक कदम उठाया गया।
स्थानीय बुजुर्ग सोनसाय देवांगन और रामलाल देवांगन बताते हैं कि उनके बचपन से लेकर उनके पूर्वजों के समय तक यह संरचना इसी स्थान पर विद्यमान रही है। बुजुर्गों की स्मृतियों के अनुसार, नागसागर तालाब के अस्तित्व में आने के समय से ही इसका जुड़ाव स्थानीय आस्था और परंपराओं से रहा है, जहां कभी ग्राम देवता के स्नान से पूर्व अखरा खेलने की परंपरा निभाई जाती थी। स्थानीय स्तर पर अनुमान लगाया जाता है कि इसका निर्माण किसी तत्कालीन राजा अथवा जमींदार ने कराया होगा, किंतु दस्तावेजी साक्ष्यों और संदर्भों के अभाव में यह संरचना आज भी एक अनसुलझी पहेली बनी हुई है।
धरोहर की सुरक्षा के नाम पर मौके पर न तो कोई सुरक्षात्मक चबूतरा बनाया गया है और न ही इसके संदर्भ को स्पष्ट करता कोई सूचना पटल लगाया गया है। समुचित देखभाल न होने से नई पीढ़ी के लिए यह अमूल्य धरोहर महज एक पुराना पत्थर बनकर रह गई है, जबकि यह धमतरी के अनछुए सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पन्नों को उजागर करने की क्षमता रखती है। वार्डवासियों का कहना है कि यह मुद्दा कई बार स्थानीय स्तर पर उठा, किंतु पुरातत्व विभाग की उदासीनता के चलते कोई विशेषज्ञ टीम इसके वैज्ञानिक सर्वेक्षण के लिए धरातल पर नहीं पहुंची।
हटकेश्वर वार्ड के पार्षद सूरज गहरवाल ने बताया कि वार्ड की गलियों में उपेक्षित पड़ी इन प्राचीन धरोहरों के संरक्षण के लिए प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। इसके लिए जिला प्रशासन को विधिवत ज्ञापन सौंपकर स्थल की घेराबंदी, विशेषज्ञ सर्वेक्षण और संरक्षण की मांग रखी गई है, ताकि इस ऐतिहासिक विरासत को समय रहते सुरक्षित किया जा सके।
