मुंबई। हिंदी और मराठी सिनेमा के प्रखर और बहुमुखी अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की आयु में निधन हो गया। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, वह गोवा स्थित अपने आवास पर अचेत अवस्था में पाए गए थे। इसके तुरंत बाद उन्हें निकटवर्ती मणिपाल अस्पताल ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों के हरसंभव प्रयास के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। अस्पताल के प्रमुख डॉ. शेखर सालकर ने जानकारी दी कि लगभग 45 मिनट तक सीपीआर दिए जाने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अस्पताल प्रशासन द्वारा मेडिको-लीगल औपचारिकताएं पूरी करने के साथ ही उनके पार्थिव शरीर का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।
प्राथमिक चिकित्सीय रिपोर्ट के मुताबिक उनके निधन का कारण कार्डियक अरेस्ट बताया जा रहा है। उनके अचानक चले जाने से पूरे भारतीय फिल्म जगत और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई है।
हाल ही में लोकप्रिय रियलिटी शो ‘कौन बनेगा करोड़पति 16’ के एक मंच पर नजर आए नाना पाटेकर ने अपने जीवन के अनछुए पहलुओं को साझा किया था। अभिनय के साथ-साथ उनका राष्ट्रप्रेम भी जगजाहिर रहा है; अगस्त 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान उन्होंने सेना की क्विक रिस्पॉन्स टीम के साथ एलओसी पर सक्रिय रूप से अपनी सेवाएं दी थीं। इस दौरान उन्होंने मिलिट्री अस्पताल में घायलों की मदद की और कठोर सैन्य अनुशासन के बीच समय बिताया, जिसका प्रभाव उनके जीवन और व्यक्तित्व पर हमेशा झलकता रहा।
अपनी बेबाक संवाद अदायगी और जीवंत अभिनय के लिए पहचाने जाने वाले नाना पाटेकर ने भारतीय सिनेमा को कई अमर किरदार दिए। उन्हें फिल्म ‘परिंदा’ (1990) में सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता, ‘क्रांतिवीर’ (1995) में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और ‘अग्नि साक्षी’ (1997) में सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के लिए प्रतिष्ठित राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उनका जाना कला और सिनेमा जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
