जांजगीर-चांपा। प्रदेश के अलग-अलग जिलों में आयुष्मान योजना के तहत निजी अस्पतालों में अनियमितताओं की शिकायतों के बाद कार्रवाई की खबरों के बीच अब जांजगीर जिला मुख्यालय के कुछ निजी अस्पताल भी सवालों के घेरे में हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कुछ अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड के जरिए ऐसे इलाज और मरीजों के नाम पर भी क्लेम तैयार किए जाने की आशंका है, जिनकी वास्तविकता की जांच जरूरी है।
शिकायतों में यह भी आरोप लगाया गया है कि जिला अस्पताल से मरीजों को निजी अस्पतालों तक पहुंचाने के लिए कथित तौर पर दलाल सक्रिय हैं और मरीजों को निजी अस्पताल में भर्ती कराने के बाद आयुष्मान योजना से राशि का क्लेम किया जाता है। केस लाने पर निजी अस्पताल संचालक द्वारा दलालों को कमीशन दिया जाता है
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि शिकायतें लंबे समय से सामने आ रही हैं तो आयुष्मान योजना की जांच एजेंसी ने अब तक रिकॉर्ड की गहन जांच क्यों नहीं की? जिला मुख्यालय के चांपा रोड सहित अन्य क्षेत्रों में संचालित दर्जनों निजी अस्पतालों के आयुष्मान क्लेम, मरीजों की भर्ती, डिस्चार्ज रिकॉर्ड, ऑपरेशन विवरण और वास्तविक मरीजों से मिलान कराया जाए तो तस्वीर साफ हो सकती है। जांजगीर-चाम्पा रोड में स्थित एक निजी अस्पताल में यह सुनने में आया है कि अस्पताल के संचालक आयुर्वेदिक डॉक्टर हैं, लेकिन एलो पेथीक का इलाज करता है वहीं अन्य जिले में नौकरी कर रहा एक ड्रेसर यहां डायरेक्टर का काम करता है।
शिकायतों में कुछ अस्पतालों में डॉक्टरों की योग्यता, कंसल्टेंट के नाम पर अस्पताल संचालन और चिकित्सा पद्धति से जुड़े नियमों के पालन पर भी सवाल उठाए गए हैं। एक अन्य आरोप में सरकारी सेवा से जुड़े कर्मचारी द्वारा निजी अस्पताल संचालन किए जाने की बात कही गई है, जिसकी भी संबंधित विभाग से जांच की जरूरत है।
अब सवाल कार्रवाई का नहीं, जांच की पारदर्शिता का है। यदि गड़बड़ी सामने आती है तो सरकारी योजना के पैसे की कथित लूट पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए और इनका लाइसेंस निरस्त करना चाहिए।
