नई दिल्ली। देश के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों (IITs) में छात्रों के मानसिक दबाव और अवसाद की भयावह स्थिति एक बार फिर गंभीर चर्चा के केंद्र में है। हाल ही में आईआईटी मुंबई में परीक्षा के दौरान अनुचित साधन के कथित इस्तेमाल के आरोप के बाद 22 वर्षीय बीटेक छात्र साहिल रवींद्र वाकोडे द्वारा हॉस्टल में आत्महत्या किए जाने की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। यह अकेला मामला नहीं है; संसद में प्रस्तुत आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों (2020-21 से 2024-25) के दौरान देश भर के 23 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में कुल 45 होनहार छात्रों ने आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठाया है।
लोकसभा में पूछे गए एक तारांकित प्रश्न के उत्तर में संकलित इन आंकड़ों ने संस्थानों के आंतरिक माहौल और छात्रों पर सामाजिक-मानसिक दबाव को लेकर चिंताएं और बढ़ा दी हैं। कुल 45 मामलों में से 62 प्रतिशत से अधिक (28 छात्र) सामाजिक रूप से वंचित वर्गों से जुड़े थे। इनमें अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के 12, अनुसूचित जाति (एससी) के 9 और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के 7 छात्र शामिल हैं। इसके अलावा 16 छात्र सामान्य वर्ग और एक छात्र आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) से था। इसके अतिरिक्त, इस अवधि के दौरान 8 अप्राकृतिक मौतें भी अलग से दर्ज की गईं, जिन्हें आत्महत्या के इन 45 मामलों में शामिल नहीं किया गया है।
संस्थान-वार स्थिति का विश्लेषण करें तो सबसे अधिक 7 आत्महत्याएं आईआईटी हैदराबाद में दर्ज की गईं। इसके बाद आईआईटी खड़गपुर, आईआईटी दिल्ली और आईआईटी कानपुर में छह-छह मामले सामने आए, जबकि आईआईटी मद्रास में पांच और आईआईटी (बीएचयू) वाराणसी में चार छात्रों ने अपनी जान गंवाई। आंकड़ों का वार्षिक रुझान बताता है कि वर्ष 2023-24 में इस तरह के मामलों में अप्रत्याशित उछाल आया, जब यह संख्या पिछले वर्ष के 6 से बढ़कर सीधे 16 तक पहुंच गई। वहीं, वर्ष 2024-25 में भी 13 मामले दर्ज किए गए, जिनमें चार छात्र ओबीसी, तीन एसटी, दो एससी और चार सामान्य वर्ग से थे।
इस बीच, आईआईटी मुंबई के पवई परिसर से सामने आई हालिया घटना ने परिसर में छात्रों के तनाव प्रबंधन पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। ऊर्जा विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग में बीटेक द्वितीय वर्ष के छात्र वाकोडे शुक्रवार को छात्रावास संख्या-4 के अपने कमरे में फंदे से लटके मिले। पुलिस और संस्थान के अनुसार, छात्र ने परीक्षा के दौरान उत्तर तलाशने के लिए प्रश्न-पत्र कथित तौर पर ‘चैटजीपीटी’ पर अपलोड किया था और पकड़े जाने के बाद संभवतः तनाव में यह कदम उठाया। उल्लेखनीय है कि इसी परिसर में पिछले सात महीनों के भीतर किसी छात्र द्वारा उठाया गया यह तीसरा आत्मघाती कदम है, जो इन प्रीमियर संस्थानों में तत्काल और प्रभावी मानसिक स्वास्थ्य परामर्श व्यवस्था की सख्त जरूरत को रेखांकित करता है।
