नई दिल्ली। राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के सभी छह अंतरे गाने को अनिवार्य बनाने और इसका पालन न करने पर कानूनी या आपराधिक सजा तय किए जाने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने इस संबंध में केंद्र सरकार के हालिया सर्कुलर और कानूनी संशोधन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र से दो सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गीत न गाने पर दंडात्मक कार्रवाई के प्रावधानों की संवैधानिक वैधता की गंभीर न्यायिक जांच जरूरी है।
जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. एस. मुरलीधर ने दलील दी कि आजादी के लगभग 80 वर्षों बाद पहली बार इसे नागरिकों पर अनिवार्य रूप से थोपा जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई भी नियम लागू करने से पहले देश की जनता के बीच व्यापक सहमति और राय-मशविरा होना चाहिए था, जिस पर पीठ ने भी सहमति जताते हुए कहा कि आम सहमति की बात उचित है। याचिका में रेखांकित किया गया कि वंदे मातरम के चार अंतरों में धार्मिक आस्था और देवी-देवताओं का संदर्भ है, लिहाजा इसे सभी नागरिकों के लिए कानूनी बाध्यता बनाना देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने के प्रतिकूल है।
दूसरी तरफ, केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने औपचारिक नोटिस जारी करने का विरोध करते हुए कहा कि इससे अनावश्यक सनसनी और विवाद को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने जोरदार तर्क रखते हुए कहा कि धर्मनिरपेक्षता की परिभाषा इतनी संकीर्ण नहीं हो सकती और गीत के दो पद गाए जाएं या सभी छह पद, यह तय करने का वैधानिक अधिकार पूरी तरह से चुनी हुई सरकार के पास है। इस पर पीठ ने टिप्पणी की कि वंदे मातरम के राष्ट्रीय गीत होने पर कोई संदेह नहीं है, किंतु नागरिकों पर सजा का प्रावधान थोपने के पहलू का परीक्षण आवश्यक है।
गौरतलब है कि यह कानूनी विवाद प्रसिद्ध कर्नाटक संगीतकार टीएम कृष्णा द्वारा दायर याचिका के बाद सामने आया है। याचिका में केंद्र सरकार के उस सर्कुलर और हालिया संशोधन को चुनौती दी गई है, जिसके तहत वंदे मातरम को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान कानूनी संरक्षण और दर्जा देते हुए इसके सभी छह अंतरे गाना अनिवार्य किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को याचिका की प्रति सौंपने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए दो सप्ताह बाद का समय निर्धारित किया है।
