चीनी सत्याग्रह के मंच पर व्यास कश्यप के बिगड़े बोल से सियासी बवाल- जुबान फिसली या भीतर का गुबार बाहर आया?
जांजगीर-चांपा। सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने और महंगाई के मुद्दे पर जनता की आवाज उठाने जांजगीर के कचहरी चौक पहुंचे कांग्रेसियों को शायद यह अंदाजा भी नहीं था कि आंदोलन की सबसे बड़ी सुर्खी सरकार नहीं, बल्कि उनकी अपनी पार्टी के विधायक के बयान बन जाएंगे। चीनी सत्याग्रह आंदोलन के दौरान जांजगीर-चांपा विधायक व्यास कश्यप के भाषण में कथित तौर पर कांग्रेस पार्टी को लेकर ही ऐसा बयान सामने आया, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
मंच पर कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता मौजूद थे। भाषण का मकसद केंद्र सरकार की नीतियों और महंगाई को निशाने पर लेना था, लेकिन भाषण के दौरान विधायक की जुबान फिसली और बयान का रुख अपनी ही पार्टी की तरफ जाता दिखाई दिया। देखते ही देखते आंदोलन का मुद्दा पीछे छूट गया और चर्चा विधायक के बयान की होने लगी।
सियासी गलियारों में अब सबसे बड़ा सवाल यही तैर रहा है। आखिर कांग्रेस के मंच से कांग्रेस के खिलाफ बोलने की नौबत क्यों आई? क्या यह महज भाषण के दौरान हुई जुबान की चूक थी, या फिर पार्टी के भीतर चल रही नाराजगी और खींचतान अनजाने में मंच पर बाहर आ गई?
विधायक के कथित बयान का वीडियो भी चर्चा में है। विरोधी खेमे को कांग्रेस पर तंज कसने का मौका मिल गया है, जबकि कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच भी बयान को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
जिस आंदोलन में सरकार की घेराबंदी होनी थी, वहां कांग्रेस को अपने ही विधायक के बोल का बचाव करना पड़े। तो इसे सियासी विडंबना कहें या मंच पर निकला अंदरूनी गुबार?
फिलहाल इतना तय है कि चीनी सत्याग्रह ने चीनी के दाम से ज्यादा विधायक के बोल में मिठास की कमी को लेकर सियासी गर्मी बढ़ा दी है।
कांग्रेस के चीनी सत्याग्रह और सरकार के खिलाफ लगाए गए आरोपों को लेकर अब सियासत गरमा गई है। कांग्रेस के बयान पर बीजेपी ने आड़े हाथों लेते हुए पलटवार किया है। बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक ड्रामा करार देते हुए कहा कि विपक्ष को जनता के मुद्दों पर तथ्य और आंकड़ों के साथ बात करनी चाहिए, महज बयानबाजी से राजनीति नहीं चलती।
