जांजगीर-चांपा। जिले में पत्रकारिता की आड़ में कथित तौर पर अवैध वसूली करने वाले लोगों की सक्रियता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि कुछ लोग बाकायदा ग्रुप बनाकर विभिन्न सरकारी व निजी संस्थानों, कार्यालयों तथा प्रतिष्ठानों में पहुंच रहे हैं और टूर, पिकनिक सहित अन्य आयोजनों के नाम पर चंदा अथवा आर्थिक सहयोग की मांग कर रहे हैं। इससे न केवल संबंधित संस्थानों में असमंजस की स्थिति बन रही है, बल्कि पत्रकारिता जैसे सम्मानित पेशे की छवि भी प्रभावित हो रही है।
बताया जा रहा है कि कुछ लोग खुद को पत्रकार बताते हुए समूह में संस्थानों तक पहुंचते हैं और अपनी पहचान का दबाव बनाकर राशि की मांग करते हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति के फर्जी पत्रकार होने की पुष्टि संबंधित मीडिया संस्थान या अधिकृत दस्तावेजों से ही की जा सकती है। ऐसे में बिना सत्यापन किसी को पत्रकार मानकर सहयोग करने से बचने की जरूरत है।
जानकारों का कहना है कि पत्रकारिता के नाम पर किसी भी प्रकार की अवैध वसूली स्वीकार्य नहीं है। यदि कोई व्यक्ति पत्रकार होने का दावा कर टूर, पिकनिक या अन्य बहाने से जबरन राशि मांगता है तो संबंधित संस्थान उसके पहचान-पत्र और संस्थान की पुष्टि करें। संदेह होने पर पूरे मामले की शिकायत नजदीकी थाने अथवा पुलिस अधीक्षक कार्यालय में की जा सकती है।
वहीं, वास्तविक पत्रकार संगठनों और मीडिया संस्थानों से भी ऐसे मामलों में स्पष्टता बरतने तथा अपने नाम का दुरुपयोग रोकने की अपेक्षा की जा रही है। पुलिस से भी मांग है कि पत्रकारिता की आड़ में वसूली करने वालों की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।
