अम्बिकापुर। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई ‘अटल परिसर योजना’ अब निर्माण एजेंसियों और ठेकेदारों की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। सरगुजा जिले के सीतापुर नगर पंचायत स्थित आहारा तालाब परिसर में स्थापित पूर्व प्रधानमंत्री की प्रतिमा पहली ही बारिश का थपेड़ा सहन नहीं कर सकी। महज छह महीने पहले, 25 दिसंबर 2025 को अटल जयंती के अवसर पर बड़े गाजे-बाजे के साथ स्थापित की गई इस प्रतिमा का रंग धुल चुका है, पपड़ी उखड़ गई है और शरीर पर गहरी दरारें साफ झलकने लगी हैं। करीब 6.99 लाख रुपये की लागत से तैयार इस प्रतिमा के भीतर से धातु के बजाय सीमेंट जैसी घटिया सामग्री दिखने के दावों ने प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा दिया है।

धातु शिल्प विशेषज्ञों के अनुसार, यदि प्रतिमा विशुद्ध रूप से कांस्य (ब्रांज) से निर्मित होती तो बारिश के पानी से इसमें दरारें पड़ना या पपड़ी निकलना नामुमकिन था। शुरुआती स्थिति को देखकर मिश्रित धातु अथवा सीमेंट के अवैध इस्तेमाल के साथ-साथ बड़े पैमाने पर वित्तीय हेराफेरी की आशंका जताई जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय विधायक रामकुमार टोप्पो ने निष्पक्ष जांच के कड़े निर्देश दिए हैं, वहीं नगर पंचायत सीएमओ ओमप्रकाश शर्मा ने बताया कि गुणवत्ता पर संशय के चलते ठेकेदार का अंतिम भुगतान फिलहाल रोक दिया गया है।

गौरतलब है कि कटघोरा और मरवाही के बाद सीतापुर में सामने आई इस गड़बड़ी ने पूरी योजना की पारदर्शिता पर ग्रहण लगा दिया है। अब जनभावनाओं से जुड़ी इस योजना में राज्यभर की सभी स्थापित प्रतिमाओं की विशेषज्ञ जांच कराने की मांग जोर पकड़ रही है, जिसके बाद जिला कलेक्टरों और मुख्य नगरपालिका अधिकारियों को निर्माण कार्यों की बारीकी से पड़ताल के निर्देश जारी किए गए हैं।
