जांजगीर-चांपा। नवागढ़ जनपद क्षेत्र में फर्जी जॉब कार्ड बनाने और मजदूरी राशि में गड़बड़ी के मामले में तहसीलदार द्वारा जांच कर कलेक्टर को प्रतिवेदन सौंपे जाने के बावजूद अब तक संबंधित रोजगार सहायक पर कोई कार्रवाई नहीं होने से प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
10 अप्रैल 2026 को तहसीलदार नवागढ़ ने जांच रिपोर्ट में शिकायतों की जांच कर तथ्य सामने आने का उल्लेख करते हुए आवश्यक कार्रवाई की अनुशंसा की थी। रिपोर्ट में प्रधानमंत्री आवास योजना और मनरेगा से जुड़े मामलों में अनियमितताओं की जांच का उल्लेख है। इसके बाद मामला जिला पंचायत तक पहुंचा, लेकिन तीन माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी संबंधित रोजगार सहायक के खिलाफ न तो निलंबन की कार्रवाई हुई और न ही कोई विभागीय दंडात्मक कदम उठाया गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब जांच प्रतिवेदन में अनियमितताओं की पुष्टि हो चुकी है तो कार्रवाई में हो रही देरी कई संदेहों को जन्म दे रही है। लोगों के बीच यह चर्चा है कि कहीं जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा मामले को दबाने का प्रयास तो नहीं किया जा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जांच पूरी हो चुकी है और रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंप दी गई है, तब जिला पंचायत सीईओ द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई? क्या दोषियों को संरक्षण दिया जा रहा है या फिर फाइलें सिर्फ कार्यालयों में घूम रही हैं?
नवागढ़ ब्लॉक के ग्राम बरभाठा के ग्राम रोजगार सहायक त्रिवेडी जोशी द्वारा फर्जी जॉब कार्ड बनाने एवं पीएम आवास योजना के अंतर्गत मजदूरी राशि में फर्जीवाड़े किए जाने के संबंध में जांच पूरी हो गई है, लेकिन जिला पंचायत अधिकारियों के द्वारा मामले को अभी तक दबाया गया। मामले में जिला पंचायत और प्रशासन की चुप्पी से ग्रामीणों में नाराजगी है तथा वे दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
