सीधी। मध्यप्रदेश के सीधी जिले में प्रशासनिक लापरवाही और अनदेखी ने दो लोगों की जान ले ली। रामपुर नैकिन न्यायालय परिसर में सोमवार दोपहर घटी यह घटना शासकीय तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। अचानक शुरू हुई तेज बारिश और कड़कती बिजली से बचने के लिए परिसर में मौजूद चार लोगों ने पास ही स्थित एक पुराने और जर्जर शासकीय भवन में शरण ली। लेकिन उन्हें अंदाज़ा भी नहीं था कि जिस छत का वे सहारा ले रहे हैं, वही कुछ ही पलों में उनके लिए काल बन जाएगी।
चारों लोगों के भवन के भीतर पहुंचते ही भरभराकर इमारत की दीवारें गिर गईं और पूरी संरचना मलबे के ढेर में तब्दील हो गई। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। स्थानीय निवासियों की सतर्कता और रामपुर नैकिन थाना पुलिस की तत्परता से तुरंत युद्धस्तर पर राहत व बचाव कार्य शुरू किया गया। काफी मशक्कत के बाद मलबे में दबे चारों लोगों को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक दो लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो चुकी थी।
हादसे में घायल दो अन्य लोगों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां एक की नाजुक स्थिति को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद रीवा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। दूसरे घायल का इलाज स्थानीय अस्पताल में जारी है। घटना की सूचना मिलते ही सीधी कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने मौके पर पहुंचकर जायजा लिया। हादसे के तुरंत बाद प्रशासन ने बुलडोजर बुलाकर जर्जर ढांचे को पूरी तरह ज़मींदोज़ कर दिया, ताकि भविष्य में ऐसा हादसा दोबारा न हो।
प्रशासन की ओर से मृतकों के परिजनों को तात्कालिक तौर पर 20-20 हजार रुपये और घायलों को 10-10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया गया है। साथ ही, मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं कि आखिर इस जर्जर भवन को समय रहते क्यों नहीं हटाया गया और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। यह त्रासदी केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सरकारी परिसरों में खड़े जर्जर भवनों की नियमित मॉनिटरिंग पर एक बड़ा सवालिया निशान है। यदि समय रहते इस खतरे को पहचान कर हटा दिया गया होता, तो दो असमय गई जिंदगियों को बचाया जा सकता था।
