बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में सरकारी खजाने को चूना लगाने वाले एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश हुआ है, जिसने मौत के गम को भी ठगी का जरिया बना लिया। पुलिस ने करोड़ों रुपये के हाई-प्रोफाइल ‘सर्पदंश मुआवजा घोटाले’ में ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए 12 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है। शुरुआती तफ्तीश में ही 68 लाख रुपये के फर्जीवाड़े की पुष्टि हो चुकी है। पकड़े गए आरोपियों में सिम्स (CIMS) की पूर्व डॉक्टर प्रियंका सोनी, एसडीएम के रीडर नरेंद्र कौशिक, तहसीलदार के रीडर हरीश राठौड़ और इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड माना जा रहा तहसीलदार का दैनिक वेतनभोगी ड्राइवर गोविंद विश्वकर्मा शामिल हैं। पुलिस का दावा है कि इस सिंडिकेट में अभी कई और सफेदपोशों के चेहरे बेनकाब होना बाकी हैं, जिससे आने वाले दिनों में गिरफ्तारियों का आंकड़ा और बढ़ सकता है।
इस पूरे फर्जीवाड़े की परतें जब खुलीं, तो पुलिस भी हैरान रह गई। महज आठवीं पास ड्राइवर गोविंद विश्वकर्मा इस पूरे रैकेट की मुख्य कड़ी था। उसने प्रशासनिक व्यवस्था की कमियों का फायदा उठाकर डॉक्टर, वकील और राजस्व कर्मचारियों का एक तगड़ा नेटवर्क तैयार कर लिया था। गोविंद सबसे पहले वकील हीरा प्रसाद खांडेकर के जरिए उन परिवारों की जानकारी जुटाता था, जिनके घर में किसी की सामान्य मौत, हार्ट अटैक या करंट लगने से जान गई हो। इसके बाद, सिम्स की तत्कालीन डॉक्टर से सांठगांठ कर शव का फर्जी पोस्टमार्टम और सर्पदंश (सांप काटने) का जाली मेडिकल सर्टिफिकेट तैयार कराया जाता था। ड्राइवर होने के नाते गोविंद की पहुंच सीधे अधिकारियों तक थी, जिसका फायदा उठाकर वह फाइलों को आगे बढ़ाता और तहसीलदार व एसडीएम के जाली हस्ताक्षर व फर्जी सील-मुहर लगाकर मुआवजे की राशि स्वीकृत करा लेता था। पुलिस ने पिछले 15 दिनों में ताबड़तोड़ छापेमारी कर आरोपियों के ठिकानों से भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज और अधिकारियों की नकली मुहरें बरामद की हैं।
बिलासपुर पुलिस अधीक्षक (SP) रजनेश सिंह ने बताया कि यह पूरा फर्जीवाड़ा साल 2019 से 2023 के बीच सबसे ज्यादा सक्रिय था। गड़बड़ी का पहला सुराग तब मिला जब बिल्हा थाने में डॉक्टर प्रियंका सोनी के खिलाफ शिकायत दर्ज हुई। इसके बाद जब कड़ियां जोड़ी गईं, तो एक के बाद एक चौंकाने वाले खुलासे होते गए। एसएसपी ने साफ किया है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और जल्द ही कम से कम 10 से 12 अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया जाएगा। मामले की गंभीरता और इसके फैलाव को देखते हुए सरकंडा, तखतपुर और तोरवा थाना पुलिस को संयुक्त रूप से जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। गौरतलब है कि यह संवेदनशील मामला बेलतरा विधानसभा के विधायक सुशांत शुक्ला ने विधानसभा सत्र के दौरान पुरजोर तरीके से उठाया था, जिसके बाद शासन-प्रशासन हरकत में आया और पुलिस ने इस बड़े सिंडिकेट को ध्वस्त करने में सफलता पाई।
