अम्बिकापुर। झारखण्ड के धनबाद जिले के कुख्यात वासेपुर में हुए दोहरे हत्याकांड के सजायाफ्ता आरोपी शब्बीर अहमद को पनाह देने के मामले में पुलिस और जिला प्रशासन ने अपनी जांच तेज कर दी है। आरोपी शब्बीर पिछले 12 वर्षों से अम्बिकापुर में नाम बदलकर या छिपकर रह रहा था। बीते 29 जून को झारखण्ड पुलिस ने एक छापेमार कार्रवाई के दौरान शब्बीर को पकड़ भी लिया था, लेकिन वह बेहद शातिराना तरीके से एक बार फिर पुलिस को चकमा देकर फरार होने में कामयाब रहा। इस पूरे मामले में मुस्तैद स्थानीय पुलिस ने अब तक दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
इसी सिलसिले में अम्बिकापुर के प्रसिद्ध ‘राजहंस ट्रांसपोर्ट’ के मालिक पर भी आरोपी को संरक्षण देने के गंभीर आरोप लगे हैं, जिसके बाद पुलिस ने ट्रांसपोर्ट के एक संचालक के विरुद्ध मामला दर्ज कर बारीकी से जांच शुरू कर दी है। हालांकि, पिछले 22 दिनों की सघन जांच के बाद भी पुलिस अब तक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। इस बीच, विवादों में घिरे राजहंस ट्रांसपोर्ट के ओनर इरशाद अहमद ने सामने आकर अपनी सफाई दी है। उनका कहना है कि व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा और परमिट के विवाद को लेकर कुछ विरोधी लोग उनके ट्रांसपोर्ट व्यवसाय को बदनाम करने के लिए यह झूठा षड्यंत्र रच रहे हैं।
इरशाद अहमद ने स्पष्ट किया कि सजायाफ्ता आरोपी शब्बीर से न तो उनके परिवार का कोई संबंध है और न ही उनके ट्रांसपोर्ट व्यवसाय में कोई लेन-देन है। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस और जिला प्रशासन की हर जांच में उनकी कंपनी पूरा सहयोग कर रही है। इसके साथ ही उन्होंने पुलिस प्रशासन से इस पूरे संवेदनशील मामले की निष्पक्षता से जांच करने की मांग की है ताकि सच सबके सामने आ सके।
