रायपुर। महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप मामले में हुई एक नई गिरफ्तारी ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर भूचाल ला दिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा ईबिक्सकैश के चेयरमैन विकास गर्ग की गिरफ्तारी के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सीधे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को कटघरे में खड़ा कर दिया है। भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक लंबा पोस्ट साझा करते हुए आरोप लगाया कि गिरफ्तार विकास गर्ग भाजपा के दिल्ली आर्थिक प्रकोष्ठ के चेयरमैन हैं और पूर्व भाजपा विधायक नंद किशोर गर्ग के बेटे हैं। बघेल ने इस पूरे नेटवर्क को भाजपा का ‘सट्टा विंग’ करार देते हुए दावा किया कि महादेव ऐप पूरी तरह से भाजपा के शीर्ष नेताओं के संरक्षण में चल रहा था।
पूर्व मुख्यमंत्री के इन गंभीर आरोपों पर सत्ताधारी दल भाजपा ने भी बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। भाजपा विधायक सुशांत शुक्ला ने बघेल के दावों को खारिज करते हुए पलटवार किया कि महादेव ऐप के असली पैरोकार तो खुद भूपेश बघेल थे। उन्होंने तीखा तंज कसते हुए कहा कि महादेव ऐप के काले कारनामों के कारण ही छत्तीसगढ़ की जनता ने कांग्रेस को ‘महादेव का श्राप’ दिया, जिसके चलते साल 2023 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का पूरी तरह सफाया हो गया। शुक्ला ने साफ किया कि इस मामले में किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा और जो लोग पहले इस अवैध कारोबार को संरक्षण दे रहे थे, आज वही कार्रवाई से तिलमिलाए हुए हैं।
इस पूरे सियासी विवाद की जड़ में विकास गर्ग पर ईडी की हालिया कार्रवाई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का दावा है कि ईडी ने विकास गर्ग को 1200 करोड़ रुपये से अधिक के अवैध वित्तीय लेनदेन के आरोप में दबोचा है और उनसे जुड़ी 900 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां भी जब्त की जा चुकी हैं। बघेल ने आरोप लगाया कि विकास गर्ग इस सिंडिकेट से हर महीने करीब 450 करोड़ रुपये कमा रहे थे। उनका कहना है कि इस अकूत कमाई को लेकर सिंडिकेट के भीतर जब आपसी विवाद बढ़ा, तब जाकर केंद्रीय एजेंसी को मजबूरी में यह कदम उठाना पड़ा। बघेल ने सवाल उठाया कि इस मामले की जांच तो चल रही है, लेकिन ईडी विकास गर्ग से जुड़ी कई बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील जानकारियों को सार्वजनिक करने से बच रही है।
अपनी घेराबंदी को मजबूत करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल ने अपनी तत्कालीन सरकार के कार्यकाल के दौरान की गई कार्रवाइयों का भी ब्यौरा दिया। उन्होंने याद दिलाया कि छत्तीसगढ़ में महादेव ऐप के खिलाफ सबसे पहले उनकी ही सरकार ने कड़ा एक्शन लिया था। उस दौरान राज्य पुलिस ने 72 एफआईआर दर्ज की थीं, 400 से ज्यादा आरोपियों को जेल भेजा गया था, हजारों बैंक खाते फ्रीज किए गए थे और भारी मात्रा में डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए थे। इतना ही नहीं, कांग्रेस सरकार ने गूगल को पत्र लिखकर इस ऐप को प्ले स्टोर से हटाने की मांग की थी और केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय से ऐप के संचालकों के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी करने की भी सिफारिश की थी। बघेल ने खेद जताते हुए कहा कि इस सबके बावजूद भाजपा ने केवल राजनीतिक फायदे के लिए उनकी सरकार की छवि खराब करने की कोशिश की।
खबर के इस पड़ाव पर पूर्व मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार की मंशा पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने पूछा कि अगर केंद्रीय एजेंसियां इस मामले की इतनी ही गंभीरता से जांच कर रही हैं, तो अब तक इस सट्टेबाजी ऐप के पूरे सिंडिकेट पर पूरी तरह ताला क्यों नहीं लगाया जा सका है? बघेल ने तीखा सवाल दागते हुए अपनी बात खत्म की कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी है कि महादेव ऐप के जो मुख्य ऑपरेटर विदेशों में बैठकर इस पूरे नेटवर्क को चला रहे हैं, उन्हें अब तक प्रत्यर्पण के जरिये भारत क्यों नहीं लाया जा सका है?
