नई दिल्ली। भारतीय राजनीति में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को हमेशा एक शांत और गंभीर राजनेता के रूप में देखा गया है, लेकिन साल 2012 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान एक ऐसा वाकया भी आया जब वह बेहद भावुक और व्यथित हो गए थे। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) एस.वाई. कुरैशी ने अपनी किताब में देश के सियासी गलियारों को हिला देने वाले इस ऐतिहासिक संस्मरण को साझा किया है। उन्होंने खुलासा किया है कि अपने ही दल के मंत्रियों के आचरण से दुखी होकर तत्कालीन प्रधानमंत्री ने यहां तक कह दिया था कि अगर उनकी नीयत पर शक किया गया तो वह आत्महत्या कर लेंगे।
इस पूरे विवाद की शुरुआत उत्तर प्रदेश के चुनावी समर से हुई थी, जब तत्कालीन केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने एक जनसभा में यह घोषणा कर दी कि यदि कांग्रेस सत्ता में आई तो अल्पसंख्यकों का कोटा बढ़ा दिया जाएगा। आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद की गई इस घोषणा को विपक्ष ने नियमों का खुला उल्लंघन माना। भारतीय जनता पार्टी ने तुरंत इसकी शिकायत निर्वाचन आयोग से कर दी। मामला पेचीदा था क्योंकि सवाल चुनावी वादों और मतदाताओं को दिए जाने वाले प्रलोभन के बीच की धुंधली लकीर का था। आयोग के सामने कांग्रेस की तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी और भाजपा की ओर से अरुण जेटली जैसे दिग्गज कानूनी विद्वानों ने चार दिनों तक तीखी बहस की, जिसके बाद आखिरकार चुनाव आयोग ने कानून मंत्री खुर्शीद के बयान की कड़े शब्दों में निंदा की।
निर्वाचन आयोग की इस सख्त कार्रवाई से सरकार के भीतर खलबली मच गई और कुछ केंद्रीय मंत्रियों तथा नेताओं ने चुनाव आयोग सहित व्यक्तिगत रूप से एस.वाई. कुरैशी पर अमर्यादित टिप्पणियां करनी शुरू कर दीं। संस्थान की साख पर उठते सवालों से आहत कुरैशी की मुलाकात जब प्रधानमंत्री के तत्कालीन मीडिया सलाहकार हरीश खरे से हुई, तो उन्होंने अपनी नाराजगी दो टूक शब्दों में जाहिर कर दी। कुरैशी ने खरे से साफ कहा कि संवैधानिक संस्था के साथ यह बर्ताव बर्दाश्त से बाहर है और अगर उन्होंने मीडिया के सामने आकर असलियत बयां कर दी, तो सरकार के लिए मुंह छिपाना भारी पड़ जाएगा। उन्होंने यह कड़ा संदेश प्रधानमंत्री तक पहुंचाने को कहा ताकि मंत्रियों की बेलगाम बयानबाजी पर लगाम लगाई जा सके।
यह संदेश मिलते ही प्रधानमंत्री कार्यालय हरकत में आया और अगले ही दिन डॉ. मनमोहन सिंह ने खुद कुरैशी को फोन कर तुरंत मिलने का आग्रह किया। जब मुख्य चुनाव आयुक्त प्रधानमंत्री आवास पहुंचे, तो देश का वजीर-ए-आजम खुद दरवाजे पर उनका इंतजार कर रहा था। कुरैशी के कमरे में बैठते ही प्रधानमंत्री ने बेहद भारी और व्यथित स्वर में कहा कि हरीश खरे ने उन्हें पूरी बात बता दी है, और अगर चुनाव आयोग को उनकी नीयत पर रत्ती भर भी संदेह है, तो वह आत्महत्या कर लेंगे। प्रधानमंत्री के मुंह से यह बात सुनकर कुरैशी स्तब्ध रह गए, क्योंकि उनकी शिकायत सरकार के कुछ मंत्रियों के व्यवहार से थी, न कि खुद प्रधानमंत्री से।
मनमोहन सिंह ने बातचीत के दौरान स्पष्ट किया कि वह इन बयानों से पूरी तरह अनजान थे और अगर उन्हें भनक भी होती तो वह मंत्रियों को कड़ी फटकार लगाते। उन्होंने कुरैशी को आश्वस्त किया कि भविष्य में ऐसी किसी भी समस्या के लिए वे सीधे उनसे फोन पर बात कर सकते हैं। इसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री ने लोकतंत्र और संस्थाओं की गरिमा को लेकर एक ऐसी बात कही जिसे देश हमेशा याद रखेगा। उन्होंने कहा था कि निर्वाचन आयोग केवल भारत का गौरव नहीं है, बल्कि यह हमारे लोकतंत्र की आत्मा है, और अगर हमने इसे खो दिया तो समझो हमने सबकुछ खो दिया। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त लिखते हैं कि देश के प्रधानमंत्री की इस ईमानदारी और संस्थाओं के प्रति अगाध सम्मान ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया था।
