नई दिल्ली। भीषण गर्मी और उमस के थपेड़ों से बेहाल देश के लिए जुलाई का महीना बड़ी राहत लेकर आया है। देशभर में मॉनसून अब अपनी पूरी रफ्तार पकड़ चुका है, जिसके चलते मौसम विभाग (IMD) ने अगले चार से पांच दिनों के भीतर देश के अधिकांश हिस्सों में मूसलाधार बारिश का अनुमान जताया है। कुदरत का यह मिजाज इसलिए बदलने जा रहा है क्योंकि इस समय आसमान में एक-दो नहीं, बल्कि तीन-तीन बड़े वेदर सिस्टम एक साथ मोर्चा संभाले हुए हैं। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में जहां एक नया कम दबाव का क्षेत्र (लो-प्रेशर एरिया) आकार ले रहा है, वहीं पूर्वी बिहार के ऊपर एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र (साइक्लोनिक सर्कुलेशन) पहले से ही बना हुआ है। रही-सही कसर उत्तर-पश्चिम भारत में दस्तक देने जा रहा नया पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) पूरी कर देगा। इन तीनों सिस्टम के महामिलन से उत्तर से लेकर दक्षिण भारत तक झमाझम बारिश का ऐसा दौर शुरू होगा कि मौसम विभाग को 23 राज्यों के लिए बाकायदा अलर्ट जारी करना पड़ा है। इस दौरान कुछ इलाकों में बादलों की गड़गड़ाहट के साथ 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलने की भी आशंका है।
मौसम के इस बदले मिजाज का सबसे दिलचस्प असर दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश में देखने को मिलने वाला है। देश की राजधानी और इसके आस-पास के इलाकों में जुलाई की शुरुआत ही तूफानी अंदाज में होगी, जहां 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवाओं के साथ जोरदार बौछारें गिरेंगी। इससे पारे में भारी गिरावट आएगी और तापमान लुढ़ककर सीधे 31 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाएगा, जिससे लोगों को चिपचिपी गर्मी से बड़ी राहत मिलेगी। वहीं, उत्तर प्रदेश में तो मॉनसून ने अपना पूरा जाल बिछा दिया है। ताजनगरी आगरा और कान्हा की नगरी मथुरा से लेकर कानपुर, वाराणसी और गोरखपुर जैसे बड़े जिलों में भारी बारिश के साथ-साथ 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने की चेतावनी दी गई है।
पूरब की तरफ बढ़ें तो बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में भी बादलों का डेरा मजबूत है। बिहार के पटना, मुजफ्फरपुर और पूर्णिया जैसे जिलों में आसमानी बिजली चमकने के साथ 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है। वहीं, पड़ोसी राज्य झारखंड के रांची, धनबाद और जमशेदपुर में मध्यम से भारी बारिश का दौर नदियों के जलस्तर को बढ़ा सकता है, जिससे स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने को कहा गया है। बंगाल की खाड़ी में उठ रहे नए सिस्टम का सीधा असर पश्चिम बंगाल के कोलकाता, पुरुलिया और नादिया में दिखेगा, जहां तेज हवाओं के साथ भारी बारिश की आशंका जताई गई है।
देश के मध्य और पश्चिमी छोर यानी मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी इंद्रदेव पूरी तरह मेहरबान हैं। मध्य प्रदेश के भोपाल, विदिशा और खंडवा जैसे जिलों में भारी बारिश का ऐसा अलर्ट है कि कुछ निचले इलाकों में बाढ़ जैसे हालात भी बन सकते हैं। दूसरी तरफ, राजस्थान के जयपुर, कोटा और उदयपुर जैसे रेतीले और पहाड़ी अंचलों में बादलों की आवाजाही के बीच 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी और अच्छी बारिश दर्ज की जाएगी। इसके ठीक ऊपर, उत्तर के मैदानी राज्यों पंजाब और हरियाणा में नए पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होते ही अमृतसर, लुधियाना, अंबाला और करनाल में धूल भरी आंधी के साथ भारी बारिश का दौर शुरू होगा, जो धान की बुवाई कर रहे किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं होगा।
मायानगरी मुंबई और दक्षिण भारत के राज्यों में भी यह सिलसिला थमने वाला नहीं है। मुंबई के लिए मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी करते हुए अगले कुछ दिनों तक लगातार अच्छी बारिश के संकेत दिए हैं। वहीं, सुदूर दक्षिण के केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में भी रिमझिम और भारी बारिश का यह दौर बदस्तूर जारी रहेगा, जिससे पूरे प्रायद्वीपीय भारत के तापमान में सुखद गिरावट दर्ज की जाएगी और लोगों को मौसम का एक खुशनुमा अहसास मिलेगा।
