रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सड़कों पर मौत बनकर दौड़ने वाले नशेड़ी वाहन चालकों के खिलाफ पुलिस कमिश्नरेट ने अब पूरी तरह से कमर कस ली है। पुलिस कमिश्नर और प्रभारी पुलिस उपायुक्त (यातायात एवं प्रोटोकॉल) के कड़े निर्देशों के बाद शहर की ट्रैफिक पुलिस ‘ड्रंक एंड ड्राइव’ के खिलाफ एक बड़ा और सख्त वैधानिक अभियान चला रही है। इसी कड़ी में 27 जून की काली रात को पुलिस ने शहर के अलग-अलग कोनों में जाल बिछाकर कुल 47 ऐसे वाहन चालकों को रंगे हाथों दबोचा, जो शराब के नशे में धुत होकर दूसरों की जान जोखिम में डाल रहे थे।
सहायक पुलिस आयुक्त (यातायात) सीमा अहिरवार के नेतृत्व में टीम ने तेलीबांधा चौक, पचपेड़ी नाका चौक, भांठागांव चौक, टाटीबंध चौक, कालीबाड़ी चौक, जय स्तंभ चौक, भनपुरी चौक और पंडरी थाना के सामने समेत कुल 9 संवेदनशील स्थानों पर ताबड़तोड़ चेकिंग की। इस औचक कार्रवाई से नशेड़ियों में हड़कंप मच गया।
इस विशेष जांच अभियान के दौरान पुलिस के हत्थे चढ़े 47 चालकों का आंकड़ा बेहद चौंकाने वाला है, जिसमें रईसजादों की 29 लग्जरी कारें, 4 मोटरसाइकिल, 1 ई-रिक्शा, 7 टाटा एस और 6 भारी ट्रक शामिल हैं। इन सभी आरोपियों के खिलाफ मोटर यान अधिनियम 1988 के तहत तत्काल चालानी कार्रवाई की गई है और अब इन्हें कड़े सबक के लिए सीधे न्यायालय के समक्ष पेश किया जाएगा। रायपुर पुलिस की यह सख्ती कोई तात्कालिक कार्रवाई नहीं है, बल्कि साल 2026 में अब तक कुल 3559 नशेड़ी चालकों पर गाज गिर चुकी है, जो यह साफ करता है कि शहर में कानून व्यवस्था को लेकर कितनी गंभीरता है।
यातायात पुलिस ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि यह अभियान किसी विभागीय टारगेट या लक्ष्य को पूरा करने के लिए नहीं है, बल्कि सड़कों पर होने वाले खूनी हादसों को रोकने, निर्दोष राहगीरों के जान-माल की सुरक्षा करने और शहर में एक अनुशासित यातायात व्यवस्था कायम करने के लिए लगातार जारी रहेगा। पुलिस ने आम जनता और चालकों से बेहद कड़े लहजे में अपील की है कि शराब पीकर गाड़ी चलाना न सिर्फ एक संगीन अपराध है बल्कि खुद की और दूसरों की जिंदगी से खिलवाड़ है, इसलिए जिम्मेदार नागरिक बनें और नशे में स्टीयरिंग को हाथ न लगाएं।
