रायपुर। संसदीय और लोकतांत्रिक गरिमा के दावों के बीच छत्तीसगढ़ की सियासत का एक ऐसा चेहरा सामने आया है, जो कानून और व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा जारी मई 2026 की ताजा स्टेटस रिपोर्ट के मुताबिक, सूबे के 15 से अधिक मौजूदा व पूर्व सांसदों, विधायकों और कद्दावर राजनेताओं पर अदालतों में 20 से ज्यादा गंभीर आपराधिक मुकदमे चल रहे हैं। न्यायपालिका की मुस्तैदी का आलम यह है कि इन सभी मामलों की निगरानी खुद उच्च न्यायालय की फास्ट-ट्रैक विंग द्वारा की जा रही है। 24 जून 2026 को आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक की गई इस सूची ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है, क्योंकि इसमें सत्तापक्ष और विपक्ष, दोनों ही खेमों के कई दिग्गज नाम शामिल हैं।
इस फेहरिस्त में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला नाम राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और पाटन से वर्तमान कांग्रेस विधायक भूपेश बघेल का है। बघेल पर रायपुर की विशेष सीबीआई अदालत में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की बेहद गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा लंबित है। वर्ष 2018 के इस बहुचर्चित मामले में उनके साथ कैलाश मुरारका और विजय भाटिया भी सह-आरोपी हैं, जिसकी हालिया सुनवाई 19 जून 2026 को मुकर्रर थी।
भूपेश बघेल के अलावा कांग्रेस खेमे के कई अन्य विधायक भी कानूनी चक्रव्यूह में फंसे नजर आ रहे हैं। सुकमा से विधायक कवासी लखमा मनी लॉन्ड्रिंग और एसीबी (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) के विशेष मामलों का सामना कर रहे हैं। भिलाई नगर से विधायक देवेंद्र यादव की मुश्किलें भी कम नहीं हैं; उन पर और युवा कांग्रेस नेता किशोर नवरंगे पर जून 2024 की कुख्यात बलौदाबाजार हिंसा को लेकर हत्या के प्रयास, आगजनी और बलवे जैसी गंभीर धाराएं लगी हैं। इसके साथ ही, कोटा से कांग्रेस विधायक अटल श्रीवास्तव पर बिलासपुर कोर्ट में नए कानून भारतीय न्याय संहिता के तहत मामला दर्ज है, जिसमें अगले महीने आरोप तय होने हैं। वहीं जैजैपुर से विधायक बालेश्वर साहू पर अपने पूर्व कार्यकाल (2015-2020) के दौरान जिला सहकारी बैंक में मैनेजर रहते हुए 42.78 लाख रुपये की धोखाधड़ी और गबन का संगीन आरोप है।
कानूनी मामलों की इस आंच से भारतीय जनता पार्टी भी अछूती नहीं है। राजनांदगांव के महापौर और पूर्व भाजपा सांसद मधुसूदन यादव पर चिटफंड कंपनियों के जरिए जमाकर्ताओं के हितों से खिलवाड़ करने के 6 अलग-अलग मामले चल रहे हैं। हालांकि उच्च न्यायालय ने तीन मामलों में रोक लगा रखी है, लेकिन बाकी तीन मामलों में कोई राहत न मिलने के कारण उन्हें व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया गया है। इसी तरह गरियाबंद में भाजपा के दो पूर्व विधायकों डमरूधर पुजारी और गोवर्धन मांझी पर रास्ता रोकने और बलवा करने का केस चल रहा है। भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व विधायक अशोक कुमार साहू भी कवर्धा में धोखाधड़ी के एक मामले में साक्ष्य प्रक्रिया से गुजर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, पूर्व विधायक प्रमोद शर्मा पर सरकारी काम में बाधा डालने और मारपीट के मामले में 13 जुलाई 2026 को अगली सुनवाई तय है।
उच्च न्यायालय की यह रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि माननीय कहे जाने वाले जनप्रतिनिधियों का दामन दागदार है। लोकतंत्र के मंदिर में बैठने वाले इन दिग्गजों की किस्मत का फैसला अब विशेष अदालतों की दहलीज पर टिका हुआ है।
