कांकेर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग अंतर्गत कांकेर जिले से पर्यावरण और कानून को ताक पर रखने का एक बड़ा मामला सामने आया है। भानुप्रतापपुर के रावघाट माइंस क्षेत्र में वन विभाग की नाक के नीचे बिना किसी अनुमति के न सिर्फ घने जंगलों को उजाड़ दिया गया, बल्कि रातों-रात एक लंबी सड़क भी तान दी गई। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद वन महकमे में हड़कंप मच गया है और जिम्मेदार अधिकारियों से लेकर ठेकेदार पर गाज गिरनी शुरू हो गई है।
विभागीय जांच में यह बात खुलकर सामने आई है कि रावघाट माइंस से सरगीपाल रेलवे स्टेशन तक लगभग सवा किलोमीटर (1.25 किमी) लंबी सड़क का निर्माण पूरी तरह अवैध रूप से वन भूमि पर किया गया है। इस विकास की आड़ में घने जंगल के बीच खड़े सैकड़ों बेशकीमती और हरे-भरे पेड़ों को बेरहमी से काट दिया गया।
इतने बड़े पैमाने पर हुए इस ‘ग्रीन क्राइम’ को गंभीरता से लेते हुए कांकेर के वन मंडलाधिकारी (डीएफओ) ऋषभ जैन ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। डीएफओ के निर्देश पर संबंधित ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने और भारी आर्थिक दंड लगाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
इसके साथ ही, जंगल की सुरक्षा में सीधे तौर पर तैनात बीट गार्ड और वनपाल (फॉरेस्टर) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उनके खिलाफ विभागीय जांच बिठा दी गई है। मामले की आंच अब वन विभाग के आला अफसरों तक भी पहुंच गई है; कर्तव्य में घोर लापरवाही बरतने के आरोप में संबंधित रेंजर और एसडीओ (SDO) को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है।
