भोपाल। मध्य प्रदेश के भोपाल में आज समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर एक बड़ी और निर्णायक हलचल शुरू हो गई है। मध्य प्रदेश सरकार इस कानून को अमलीजामा पहनाने के लिए पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रही है, और इसी सिलसिले में आज राजधानी के नोरोन्हा प्रशासनिक अकादमी में सुबह साढ़े दस बजे से शाम छह बजे तक सुझावों और प्रस्तुतियों का महादौर चल रहा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि सरकार आगामी 20 जुलाई से शुरू होने वाले मानसून सत्र में ही यूसीसी विधेयक को विधानसभा के पटल पर रख सकती है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हालिया बयानों ने भी इन संभावनाओं को बल दिया है, जिससे आज की इस महाबैठक की अहमियत और बढ़ गई है।
यूसीसी ड्राफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) जस्टिस देसाई की अगुवाई में हो रही इस बैठक का मुख्य ध्येय एक ऐसा समावेशी और संतुलित कानून तैयार करना है, जो समाज के हर तबके के अधिकारों की रक्षा करते हुए एक समान व्यवस्था की बुनियाद रख सके। बैठक की कार्यसूची बेहद विस्तृत है, जिसमें गृह विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, अनुसूचित जाति-जनजाति (एससी/एसटी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग जैसे महत्वपूर्ण महकमे कमेटी के सामने अपनी प्रस्तुतियां और अहम सुझाव दर्ज करा रहे हैं। इसके बाद राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ विभिन्न धर्मगुरुओं और सामाजिक संगठनों के साथ भी सीधा संवाद किया जाएगा, ताकि कानून के प्रारूप को लेकर एक व्यापक आम सहमति बनाई जा सके।
इस ड्राफ्ट को हर दृष्टिकोण से मजबूत बनाने के लिए राज्य महिला आयोग, बाल अधिकार संरक्षण आयोग और अल्पसंख्यक आयोग जैसी वैधानिक संस्थाओं के पदाधिकारियों के अलावा कानूनविदों, शिक्षाविदों और प्रशासनिक अधिकारियों को भी इस विमर्श का हिस्सा बनाया गया है। केवल संस्थागत स्तर पर ही नहीं, बल्कि आम जनता की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने ऑनलाइन माध्यम से भी सुझाव आमंत्रित किए थे, जिनकी आखिरी तारीख भी आज यानी 22 जून ही है। इन तमाम माध्यमों से मिलने वाले विचारों और फीडबैक को संकलित कर ही इस मसौदे को अंतिम रूप दिया जाएगा।
तकनीकी रूप से समझें तो यूनिफॉर्म सिविल कोड का सीधा असर विवाह, तलाक, गोद लेने, उत्तराधिकार और संपत्ति के बंटवारे जैसे बुनियादी नागरिक मामलों पर पड़ेगा, जिसके तहत देश के सभी नागरिकों के लिए एक समान नियम लागू होंगे। फिलहाल देश में अलग-अलग धार्मिक समुदायों के अपने व्यक्तिगत (पर्सनल) कानून हैं। संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत नीति-निर्देशक तत्वों में भी राज्यों से देश भर में समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास करने की अपेक्षा की गई है। उत्तराखंड के बाद मध्य प्रदेश इस ऐतिहासिक दिशा में कदम बढ़ाने वाला देश का अगला प्रमुख राज्य बनने की ओर अग्रसर है, जिसका दूरगामी प्रभाव प्रदेश की सामाजिक समरसता, न्यायिक प्रक्रिया और विशेषकर महिला अधिकारों के सुदृढ़ीकरण पर देखने को मिलेगा।
