रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) का मुद्दा एक बार फिर पूरी तरह गरमा गया है। इसकी मुख्य वजह प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता टीएस सिंहदेव का वह ताजा बयान है, जिसने न केवल नई राजनीतिक बहस को हवा दे दी है, बल्कि खुद कांग्रेस के भीतर भी असहज स्थिति पैदा कर दी है। अपनी बेबाक और साफगोई वाली छवि के लिए जाने जाने वाले सिंहदेव ने सरकार में रहते हुए भी कई बार सार्वजनिक रूप से अपनी राय रखी थी, और सत्ता बदलने के बाद भी वे अपने उसी पुराने रुख पर कायम नजर आ रहे हैं।
इस नए सियासी विवाद की शुरुआत तब हुई जब सूबे के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा ने प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर टीएस सिंहदेव को एक पत्र लिखा। इस पत्र और उससे जुड़े राजनीतिक सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए सिंहदेव ने तंज भरे लहजे में कहा कि भाजपा के मंत्री उन्हें लगातार याद कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने बेहद स्पष्ट शब्दों में यह स्वीकार कर लिया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकानों का निर्माण उस गति से नहीं हो पा रहा था जैसी उम्मीद थी। सिंहदेव ने खुलकर कहा कि उस समय वे स्वयं संबंधित विभाग के मंत्री थे और उन्हें महसूस हुआ कि वे योजना को प्रभावी तरीके से आगे नहीं बढ़ा पा रहे हैं, इसीलिए उन्होंने पीछे हटने का निर्णय लिया था और इस संबंध में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से बात करके अपना पद छोड़ दिया था।
सिंहदेव के इस बयान के सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में उनके उस पुराने इस्तीफे की चर्चा दोबारा शुरू हो गई है, जो उन्होंने कांग्रेस शासन के दौरान पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से दिया था। उस दौर में भी उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय और वित्तीय स्वीकृति की दिक्कतों को लेकर अपना असंतोष जाहिर किया था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सिंहदेव का यह कदम भले ही उनके पुराने स्टैंड की निरंतरता हो, लेकिन मौजूदा दौर में इसका राजनीतिक असर बेहद व्यापक और कांग्रेस के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।
बात सिर्फ आवास योजना तक ही सीमित नहीं रही; पत्र में कांग्रेस के कथित ‘ढाई-ढाई साल’ के सत्ता साझेदारी फॉर्मूले का जिक्र होने पर भी सिंहदेव ने अपने चिरपरिचित अंदाज में चुटकी ली। उन्होंने कहा कि इस विषय में उन्हें कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि शायद राहुल गांधी और विजय शर्मा के बीच इस मुद्दे पर कोई सीधी चर्चा होती होगी, क्योंकि असल में किसी को नहीं पता कि उस फॉर्मूले के पीछे क्या हुआ और क्या नहीं। सिंहदेव का यह बयान इसलिए भी मायने रखता है क्योंकि कांग्रेस सरकार के पूरे कार्यकाल में मुख्यमंत्री पद की इस कथित दावेदारी को लेकर अंदरूनी खींचतान लगातार बनी हुई थी।
दूसरी तरफ, भाजपा इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस पर हमलावर हो गई है। मंत्री विजय शर्मा ने अपने पत्र में सिंहदेव के पुराने इस्तीफे का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार गरीबों के पक्के मकानों के लिए जरूरी राज्य अंश की राशि उपलब्ध कराने में पूरी तरह नाकाम रही थी। भाजपा सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए उन्होंने दावा किया कि नई सरकार बनते ही इस योजना को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई और बजट में 26,908 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। शर्मा के अनुसार, ‘मोर आवास-मोर अधिकार’ अभियान के तहत पिछले ढाई वर्षों में 10.60 लाख से अधिक आवासों का निर्माण पूरा किया जा चुका है और छत्तीसगढ़ ने प्रतिदिन लगभग 2,000 आवास पूर्ण कर देश में पहला स्थान भी हासिल किया है।
इस पूरे मामले पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने भी तीखा तंज कसा है। सिंहदेव के बयान पर चुटकी लेते हुए साव ने कहा कि भाजपा नेताओं को टीएस सिंहदेव की याद आना बेहद स्वाभाविक है, क्योंकि उन्होंने खुद पत्र लिखकर सच स्वीकार किया था और पद छोड़ा था। साव ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की गलत नीतियों के कारण प्रदेश के लगभग 18 लाख गरीब परिवार अपने खुद के मकान से वंचित रह गए, जो सीधे तौर पर उनके साथ अन्याय था। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बयानबाजी ने भाजपा को एक बड़ा वाकओवर दे दिया है, जिससे आने वाले समय में छत्तीसगढ़ की धरा पर आवास योजना को लेकर शह-मात का यह खेल और आक्रामक होने वाला है।
