खैरागढ़-छुईखदान-गंडई। सरकारी नियमों को ताक पर रखकर शराब प्रेमियों की जेब पर डाका डालने वाले सिंडिकेट पर प्रशासन ने कड़ा चाबुक चलाया है। जिले के गंडई स्थित कम्पोजिट मदिरा दुकान में शासन द्वारा तय की गई कीमतों से अधिक दाम पर शराब बेचे जाने का एक बड़ा मामला सामने आया है। इस गंभीर वित्तीय अनियमितता और लापरवाही को देखते हुए आबकारी विभाग ने गुरुवार को एक बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। आबकारी आयुक्त ने गंडई वृत्त के प्रभारी और आबकारी उप निरीक्षक (सब-इंस्पेक्टर) प्रभाकर सिरमौर को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। उन पर अपने कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही, उदासीनता और कमजोर निगरानी रखने का आरोप है। इसके साथ ही, अधिक कीमत वसूलने वाले मुख्य आरोपी शराब विक्रेता के खिलाफ भी आबकारी अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है।
इस पूरे मामले का भंडाफोड़ तब हुआ जब कार्यालय आबकारी आयुक्त द्वारा गठित राज्य स्तरीय उड़नदस्ता की संयुक्त टीम ने गंडई शराब दुकान पर अचानक छापा मारा। टीम ने इस ‘ओवररेटिंग’ के खेल को रंगे हाथों पकड़ने के लिए एक बेहद दिलचस्प रणनीति अपनाई। आबकारी विभाग के अधिकारियों ने एक ‘छद्म ग्राहक’ (फर्जी कस्टमर) तैयार किया और उसे दुकान पर शराब खरीदने भेजा। जांच के दौरान जैसे ही इस फर्जी ग्राहक ने तीन पाव देशी मदिरा (प्लेन) की मांग की, वहाँ तैनात विक्रेता वेदप्रकाश निर्मलकर ने उससे तय सरकारी कीमत 240 रुपये के बजाय 250 रुपये वसूल लिए। महज 10 रुपये की इस अतिरिक्त अवैध वसूली ने पूरे विभाग की साख पर सवाल खड़े कर दिए और मौके पर मौजूद उड़नदस्ता टीम ने इस घपले को ऑन-स्पॉट पकड़ लिया।
इस खुली लूट और शासकीय नियमों के उल्लंघन को बेहद गंभीर मानते हुए प्रशासन ने तत्काल एक्शन लिया। आरोपी सेल्समैन वेदप्रकाश निर्मलकर के विरुद्ध छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम की धारा 39 (ग) के तहत तय दर से अधिक मूल्य पर मदिरा विक्रय करने का कानूनी प्रकरण दर्ज किया गया है। वहीं, अपने क्षेत्र में चल रहे इस अवैध खेल पर लगाम न कस पाने और विभागीय साख को बट्टा लगाने के कारण सब-इंस्पेक्टर प्रभाकर सिरमौर को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा है। आबकारी विभाग की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से क्षेत्र के अन्य मदिरा दुकानों के स्टाफ और बिचौलियों में हड़कंप मच गया है।
