नई दिल्ली। वैश्विक बाजार में बीते 100 दिनों से सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना कच्चा तेल आने वाले दिनों में आम उपभोक्ताओं और अर्थव्यवस्थाओं को बड़ी राहत दे सकता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (होर्मुज जलडमरूमध्य) के बंद होने के बाद से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा जिस गंभीर तेल संकट से जूझ रहा था, उसके जल्द सुलझने के आसार दिखने लगे हैं। जो कच्चा तेल कुछ समय पहले तक ग्लोबल मार्केट में 70-75 डॉलर प्रति बैरल बिक रहा था, वह इस भू-राजनीतिक तनाव के कारण 100-120 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुका है। तेल की इस आसमान छूती कीमत और बाधित होती सप्लाई के बीच ग्लोबल रेटिंग एजेंसी ‘फिच रेटिंग्स’ ने एक नया और चौंकाने वाला अनुमान जारी किया है, जो वैश्विक बाजार के लिए उम्मीद की नई किरण लेकर आया है।
फिच रेटिंग्स के ताजा आकलन के मुताबिक, साल 2026 में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तत्काल कोई जादुई गिरावट नहीं दिखेगी और मई से जुलाई के बीच इसके दाम 100 से 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊंचे स्तर पर बने रह सकते हैं। इसके बावजूद, साल 2026 के लिए कच्चे तेल की औसत कीमत 87 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान है। इस राहत की सबसे बड़ी शर्त ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने की सहमति पर टिकी है। यदि जुलाई में इस रणनीतिक समुद्री रास्ते से जहाजों की आवाजाही फिर से सामान्य हो जाती है, तो अगस्त और सितंबर से कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट का दौर शुरू हो जाएगा। अनुमान है कि अगस्त के बाद तेल के दाम घटकर 80 डॉलर और सितंबर के बाद 70 डॉलर प्रति बैरल के निचले स्तर तक आ सकते हैं।रेटिंग एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि कच्चे तेल की मौजूदा महंगाई उत्पादन घटने के कारण नहीं, बल्कि पूरी तरह से सप्लाई चेन टूटने की वजह से है। राहत की बात यह है कि वैश्विक रिफाइनरियों और तेल उत्पादन केंद्रों को कोई स्थायी नुकसान नहीं पहुंचा है। फिच का मानना है कि जुलाई में होर्मुज का रास्ता खुलते ही सितंबर तक बाजार में कच्चे तेल की ‘ओवरसप्लाई’ (अतिरिक्त आमद) होने लगेगी। इसके साथ ही ओपेक (OPEC) और ओपेक प्लस देशों द्वारा उत्पादन बढ़ाने के फैसले से कीमतों को नीचे लाने में और मदद मिलेगी। मालूम हो कि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा यानी रोजाना करीब 2 करोड़ बैरल तेल की सप्लाई रुकी हुई है। चूंकि युद्ध के बावजूद तेल के भंडार सुरक्षित हैं, इसलिए सप्लाई बहाल होते ही साल 2026 के अंत तक वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम भर-भराकर गिर सकते हैं।
रेटिंग एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि कच्चे तेल की मौजूदा महंगाई उत्पादन घटने के कारण नहीं, बल्कि पूरी तरह से सप्लाई चेन टूटने की वजह से है। राहत की बात यह है कि वैश्विक रिफाइनरियों और तेल उत्पादन केंद्रों को कोई स्थायी नुकसान नहीं पहुंचा है। फिच का मानना है कि जुलाई में होर्मुज का रास्ता खुलते ही सितंबर तक बाजार में कच्चे तेल की ‘ओवरसप्लाई’ (अतिरिक्त आमद) होने लगेगी। इसके साथ ही ओपेक (OPEC) और ओपेक प्लस देशों द्वारा उत्पादन बढ़ाने के फैसले से कीमतों को नीचे लाने में और मदद मिलेगी। मालूम हो कि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा यानी रोजाना करीब 2 करोड़ बैरल तेल की सप्लाई रुकी हुई है। चूंकि युद्ध के बावजूद तेल के भंडार सुरक्षित हैं, इसलिए सप्लाई बहाल होते ही साल 2026 के अंत तक वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम भर-भराकर गिर सकते हैं।
