नई दिल्ली। उत्तराखंड की पावन वादियों में इस वर्ष अप्रैल से शुरू हुई प्रसिद्ध चारधाम यात्रा आस्था और भक्ति के एक नए शिखर को छू रही है, जहाँ अब तक 31 लाख से अधिक तीर्थयात्री मत्था टेक चुके हैं। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र द्वारा रविवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस महाकुंभ में बाबा केदारनाथ के प्रति भक्तों का सबसे गहरा अनुराग देखने को मिला है, जहाँ 22 अप्रैल को कपाट खुलने के बाद से सर्वाधिक 11,05,676 श्रद्धालु पहुँचे।
भगवान बद्रीनाथ के दरबार में भी 23 अप्रैल से अब तक 9,08,619 भक्तों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है, जबकि गंगोत्री मंदिर में 5,28,406 (गौमुख मार्ग के 4,697 यात्रियों सहित), यमुनोत्री में 5,07,421 और पवित्र सिख तीर्थस्थल श्री हेमकुंड साहिब में 55,411 श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। श्रद्धालुओं का यह सैलाब किस कदर चरम पर है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सिर्फ एक शनिवार को ही 61,262 तीर्थयात्री 5,511 वाहनों में सवार होकर देवभूमि पहुँचे। यात्रा की शुरुआत से लेकर अब तक कुल 2,89,918 वाहनों की आवाजाही दर्ज की जा चुकी है, जिससे प्रशासन पर यातायात और सुरक्षा व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने का भारी दबाव साफ नजर आ रहा है।
लेकिन, आस्था के इस अटूट सैलाब के बीच एक बेहद चिंताजनक और दुखद पहलू भी सामने आया है, जहाँ दुर्गम रास्तों और स्वास्थ्य समस्याओं के कारण अब तक 161 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। 19 अप्रैल से सामने आए इन आँकड़ों में से 152 श्रद्धालुओं की जान ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक स्वास्थ्य बिगड़ने, दिल का दौरा पड़ने और ऑक्सीजन की कमी जैसी गंभीर दिक्कतों की वजह से गई। इसके अलावा, 8 यात्रियों की मृत्यु अन्य हादसों और एक की प्राकृतिक कारणों से हुई है।
भौगोलिक दृष्टि से देखें तो खड़ी और बेहद थका देने वाली चढ़ाई वाले यमुनोत्री मार्ग पर सबसे ज्यादा 78 श्रद्धालुओं ने अपनी जान गंवाई है। इसके बाद केदारनाथ में 47, बद्रीनाथ में 20 और गंगोत्री में 16 मौतों का आंकड़ा दर्ज किया गया है। भक्ति के इस सफर में बढ़ते हादसों को देखते हुए प्रशासन ने अब तीर्थयात्रियों से बेहद भावुक और सख्त अपील की है कि वे पहाड़ों की इस कठिन यात्रा पर निकलने से पहले अपनी मुकम्मल स्वास्थ्य जाँच जरूर करवाएं, ताकि आस्था का यह सफर सुरक्षित और सुखद बना रहे।
