धमतरी। श्यामतराई स्थित प्रदेश की प्रमुख कृषि उपज मंडी इन दिनों अव्यवस्था और किसानों की बेबसी का केंद्र बन चुकी है। मंडी से खरीदे गए धान का समय पर उठाव न होने के कारण पूरा परिसर डंपिंग यार्ड में तब्दील हो गया है, जहाँ हजारों बोरियों का अंबार लगा है। इस कदर मचे ‘जाम’ ने रबी सीजन की फसल बेचने आ रहे नए किसानों के सामने जगह का गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।
हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि धमतरी सहित पड़ोसी जिले बालोद से अपनी गाढ़ी कमाई की उपज लेकर पहुँच रहे अन्नदाताओं को शेड के नीचे चंद फीट जगह के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। पीड़ित किसान बैसाखूराम साहू, कोमल साहू और उमेश साहू ने आक्रोश जताते हुए बताया कि व्यापारियों द्वारा महीनों पहले खरीदे गए धान को शेड से नहीं हटाया गया है, जिसके चलते नए माल को सुरक्षित रखने की जगह ही नहीं बची है।
इस प्रशासनिक और व्यापारिक उदासीनता के बीच, बाजार में धान के दामों में आ रही भारी गिरावट ने किसानों की कमर तोड़ दी है। मंडी में चंद घंटों के भीतर ही आईआर-64 जैसी लोकप्रिय धान की किस्म का भाव 1850 रुपये प्रति क्विंटल से लुढ़ककर सीधे 1810 रुपये पर आ गया। महज एक दिन में 40 रुपये प्रति क्विंटल की इस बड़ी गिरावट ने किसानों को तगड़ा आर्थिक झटका दिया है। किसान पवन निषाद, पंकज देवांगन और त्रिलोक साहू का कहना है कि एक तरफ तो मंडी में उपज खाली करने की जगह नहीं है, और दूसरी तरफ औंधे मुंह गिरते दाम उनकी लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं।
इस दोहरी मार से घबराए कई किसान अब औने-पौने दाम पर फसल बेचने के बजाय, बेहतर मूल्य की उम्मीद में अपने अनाज को रोककर रखने का जोखिम उठाने को मजबूर हैं। बहरहाल, यदि मंडी प्रशासन और संबंधित अधिकारियों ने तत्काल हस्तक्षेप कर धान के उठाव की रफ्तार नहीं बढ़ाई, तो आने वाले दिनों में यह अव्यवस्था उग्र आंदोलन का रूप ले सकती है।
