नई दिल्ली। पंजाब के नवांशहर से मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाली एक ऐसी सनसनीखेज वारदात सामने आई है, जिसने समाज और पारिवारिक रिश्तों के ताने-बाने पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ एक मां के अवैध प्रेम संबंधों की कीमत उसकी अपनी ही 15 साल की बेगुनाह बेटी को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। मां के प्यार में अंधा हो चुका उसका 23 वर्षीय प्रेमी इस कदर क्रूर बन गया कि उसने न केवल मासूम की तड़पा-तड़पाकर जान ली, बल्कि उसके वजूद को हमेशा के लिए मिटाने की रूह कंपा देने वाली साजिश भी रच डाली। पुलिस ने जब इस अंधे कत्ल की गुत्थी को सुलझाया, तो सामने आई हकीकत को सुनकर खुद अनुभवी पुलिस अधिकारी भी दंग रह गए।
इस खौफनाक हत्याकांड की शुरुआत रिश्तों के उस पतन से होती है, जहाँ 45 वर्षीय मां ऊषा रानी का झुकाव अपनी उम्र से करीब आधे 23 वर्षीय युवक गुरविंदर सिंह उर्फ गोपी की तरफ हुआ। दोनों के बीच पनपे इन अवैध संबंधों में महिला की 15 वर्षीय नाबालिग बेटी अनीता लगातार रुकावट बन रही थी। इसी रुकावट को हमेशा के लिए रास्ते से हटाने के लिए आरोपी गुरविंदर ने एक बेहद खौफनाक योजना बनाई। एक दिन जब उसने देखा कि लड़की घर पर बिल्कुल अकेली है, तो उसने मौका पाकर बेहद बेरहमी से उसका गला रेत दिया और उसे मौत के घाट उतार दिया।
वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी की क्रूरता का स्तर किसी पेशेवर अपराधी जैसा था। कत्ल के बाद शव को ठिकाने लगाने और उसके टुकड़े करने की नीयत से आरोपी ने लाश को एक सूटकेस में बंद किया। इसके बाद उसने सूटकेस को अपनी मोटरसाइकिल के पीछे बांधा और खुरालगढ़ के घने जंगलों की तरफ निकल गया। अपराध का कोई भी सबूत न बचे, इसलिए आरोपी ने जंगल के सन्नाटे में सूटकेस सहित उस मासूम की लाश को आग के हवाले कर दिया।
शुरुआत में पुलिस ने इसे गुमशुदगी का एक साधारण मामला मानकर जांच शुरू की थी। लेकिन जैसे ही पुलिस को कुछ तकनीकी इनपुट मिले और शक की सुई मां के प्रेमी पर घूमी, उसे हिरासत में ले लिया गया। कड़ाई से की गई पूछताछ में जब आरोपी ने अपना जुर्म कबूला, तो पुलिस की टीमें खुरालगढ़ के जंगलों की तरफ दौड़ीं। जंगल की खाक छानने के बाद पुलिस को वहां से मृत नाबालिग लड़की का जला हुआ कंकाल बरामद हुआ, जो इस हत्याकांड की क्रूरता की गवाही खुद दे रहा था। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी गुरविंदर सिंह को गिरफ्तार कर लिया है और अदालत ने उसे चार दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है, जहाँ उससे गहन पूछताछ की जा रही है।
नवांशहर की यह घटना केवल एक साधारण आपराधिक वारदात नहीं है, बल्कि यह हमारे नैतिक मूल्यों के पतन का एक बेहद डरावना उदाहरण है। एक मां का अपनी सगी संतान के प्रति इस कदर अंधा हो जाना कि उसकी आंखों के सामने उसकी बेटी का वजूद मिटा दिया जाए, समाज के लिए एक गहरी चिंता का विषय है। यह अपराध समाज में बढ़ती अनियंत्रित इच्छाओं और मानवीय संवेदनाओं के पूरी तरह खत्म होने का एक भयावह संकेत देता है।
