नई दिल्ली/मुंबई। देश की आम जनता पर चौतरफा पड़ रही महंगाई की मार के बीच अब अपनी ग्रूमिंग और लुक को मेंटेन रखना भी जेब पर भारी पड़ने वाला है। पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और रोजमर्रा के खाद्य पदार्थों की आसमान छूती कीमतों के बाद अब आम आदमी के बजट को सैलून ने भी बिगाड़ दिया है। प्रमुख नाई संगठनों ने हेयर कटिंग, शेविंग समेत तमाम ब्यूटी और ग्रूमिंग से जुड़ी सेवाओं के दामों में तत्काल प्रभाव से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर दी है। बढ़ी हुई ये नई कीमतें शनिवार, 6 जून से पूरे राज्य में लागू हो चुकी हैं। पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र के नाई संगठनों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ते तनाव के चलते सैलून में इस्तेमाल होने वाले कॉस्मेटिक्स, ब्यूटी प्रोडक्ट्स और उपकरणों की लागत काफी बढ़ गई है, जिसके कारण उन्हें यह मजबूरन फैसला लेना पड़ा है।
इस मूल्य वृद्धि के बाद अब आम आदमी को एक सामान्य हेयरकट (बाल कटाने) के लिए 180 रुपये, जबकि एक सामान्य शेविंग (दाढ़ी बनवाने) के लिए 120 रुपये का भुगतान करना होगा। इसके अलावा, जो ग्राहक अपनी दाढ़ी ट्रिम कराना चाहते हैं, उन्हें अब 150 रुपये देने होंगे। वहीं सिर की मालिश (हेड मसाज) के लिए 180 रुपये और बाल धोने (हेयर वॉश) की कीमत 120 रुपये तय की गई है। अगर बात प्रीमियम ग्रूमिंग सर्विसेज की करें, तो फेशियल ट्रीटमेंट की शुरुआत अब न्यूनतम 700 रुपये से होगी, जबकि हेयर स्पा के लिए ग्राहकों को कम से कम 600 रुपये ढीले करने होंगे। महाराष्ट्र नाभिक महामंडल के पदाधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में सैलून चलाने का खर्च इस कदर बढ़ गया था कि पुरानी दरों पर काम करना घाटे का सौदा साबित हो रहा था।
सैलून जगत से जुड़े संगठनों का तर्क है कि पश्चिम एशिया के मौजूदा नाजुक हालातों और व्यापक वैश्विक आर्थिक उतार-चढ़ाव ने सैलून व्यवसाय के लिए जरूरी कच्चे माल की आपूर्ति और उनकी कीमतों पर बहुत बुरा असर डाला है। यही वजह है कि सैलून संचालकों को तय समय से पहले ही अपनी सेवाओं की कीमतों की समीक्षा करनी पड़ी। इस अप्रत्याशित फैसले पर स्थिति स्पष्ट करते हुए महाराष्ट्र नाभिक महामंडल के वरिष्ठ पदाधिकारी श्याम अस्करकर ने बताया कि आमतौर पर संगठन हर दो साल के अंतराल के बाद जनवरी के महीने में अपनी दरों में संशोधन करता है। लेकिन इस बार सैलून में इस्तेमाल होने वाले सामानों और अन्य आवश्यक चीजों की कीमतों में इतनी अप्रत्याशित और भारी बढ़ोतरी हुई कि उन्हें बीच सत्र में ही रेट बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
गौरतलब है कि अकेले महाराष्ट्र में एक लाख से भी ज्यादा नाई की दुकानें और सैलून संचालित होते हैं, ऐसे में दरों में किए गए इस बदलाव का सीधा असर राज्य के एक बहुत बड़े मध्यमवर्गीय उपभोक्ता वर्ग पर पड़ेगा। हालांकि, संगठन ने आम जनता को यह स्पष्ट करते हुए राहत भी दी है कि यह फैसला केवल मध्यम और सामान्य श्रेणी के सैलून पर ही लागू होता है। यह संगठन बड़े कॉर्पोरेट, प्रीमियम या लग्जरी सैलून का प्रतिनिधित्व नहीं करता है। हाई-एंड और कॉर्पोरेट सैलून आमतौर पर पहले से ही अपनी सेवाओं के लिए बहुत ज्यादा रेट वसूलते हैं, जहां महज एक बेसिक हेयरकट की कीमतें ही 500 रुपये से शुरू होती हैं।
