नई दिल्ली। तमिलनाडु की सियासत में उस वक्त एक बड़ा भूचाल आ गया, जब भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने पार्टी से औपचारिक रूप से इस्तीफा देकर अपने नए राजनीतिक आंदोलन ‘वी द लीडर्स’ का शंखनाद कर दिया। अपनी इस नई शुरुआत के साथ ही अन्नामलाई ने साबित कर दिया है कि राज्य के युवाओं और जनता के बीच उनकी लोकप्रियता किस कदर बरकरार है।
इस नए आंदोलन ने लॉन्च होने के महज 10 घंटों के भीतर ही 10 लाख से ज्यादा लोगों को अपने साथ जोड़कर तमिलनाडु की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सस्टेनिबिलिटी और युवा नेतृत्व के संकल्प के साथ शुरू हुए इस मूवमेंट को अन्नामलाई ने एक नई राजनीतिक यात्रा की शुरुआत करार दिया है, जिसका मुख्य उद्देश्य ‘आम आदमी की राजनीति’ को धरातल पर उतारना है।
इस अभूतपूर्व जनसमर्थन से गदगद पूर्व आईपीएस अधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए लिखा कि महज 10 घंटों में 10 लाख से अधिक नेताओं का पंजीकरण हमारे साझा दृष्टिकोण और सामूहिक मिशन में बढ़ते विश्वास का एक सशक्त प्रमाण है। उन्होंने इस आंदोलन पर भरोसा जताने वाले हर एक व्यक्ति के प्रति आभार व्यक्त करते हुए अपनी आधिकारिक वेबसाइट का लिंक भी साझा किया और लोगों से बदलाव का हिस्सा बनने की अपील की।
दरअसल, अन्नामलाई के इस कड़े कदम की पटकथा पिछले साल ही लिखी जाने लगी थी। अप्रैल 2025 में जब पार्टी आलाकमान ने उन्हें अध्यक्ष पद से हटाया, तभी से उनके और केंद्रीय नेतृत्व के बीच दूरियां बढ़ने लगी थीं। साल 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के प्रचार, टिकट बंटवारे और गठबंधन जैसे अहम फैसलों से पूरी तरह दरकिनार किए जाने से नाराज अन्नामलाई ने न सिर्फ चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था, बल्कि केंद्र सरकार की कुछ नीतियों पर भी खुलकर सवाल उठाए थे। इसी अनदेखी का नतीजा आज भाजपा से उनके इस्तीफे और एक नए विकल्प के उदय के रूप में सामने आया है।
दिलचस्प बात यह है कि अन्नामलाई हमेशा से ही लीक से हटकर फैसले लेने के लिए जाने जाते रहे हैं। बचपन में माता-पिता द्वारा रखे गए लंबे नाम ‘अन्नामलाई शिवा सेंथिल कुमार’ को छोटा कर उन्होंने खुद दसवीं कक्षा में अपने लिए ‘अन्नामलाई’ नाम चुना था, जिसका अर्थ भगवान शिव का रौद्र रूप होता है। साल 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रेरित होकर उन्होंने सिविल सर्विसेज (IPS) की प्रतिष्ठित नौकरी से इस्तीफा दिया था और भाजपा में शामिल हुए थे।
पार्टी ने भी उनके तेवर को देखते हुए महज 37 साल की उम्र में उन्हें तमिलनाडु भाजपा की कमान सौंप दी थी और बाद में 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में सह-प्रभारी जैसी बड़ी जिम्मेदारी भी दी थी। पुलिस की वर्दी से लेकर भाजपा के शीर्ष पद और अब ‘वी द लीडर्स’ के मंच तक, अन्नामलाई का यह सफर यह साफ करता है कि वे तमिलनाडु की राजनीति में अब एक लंबी और स्वतंत्र पारी खेलने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
