रायपुर। छत्तीसगढ़ में सुशासन का दावा करने वाली विष्णुदेव साय सरकार ने प्रशासनिक लापरवाही और बदजुबानी पर कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। दुर्ग जिले के थनौद गांव में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर (सुशासन तिहार) के दौरान एक ऐसा वाक्या सामने आया, जिसने न सिर्फ प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया, बल्कि सरकार को भी तुरंत कड़ा फैसला लेने पर मजबूर कर दिया।
दरअसल, शिविर में आम जनता की समस्याएं सुनने के बजाय दुर्ग जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) रूपेश कुमार पाण्डेय खुद विवादों के केंद्र में आ गए। उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें वे बीजेपी के दुर्ग ग्रामीण मंडल महामंत्री पुराण देशमुख के साथ तीखी बहस करते नजर आ रहे हैं। बहस इतनी बढ़ गई कि अफसर अपनी मर्यादा भूल बैठे और नेता को उंगली दिखाते हुए सरेआम चुनौती दे डाली कि “तेरे को जो करना है कर ले।”
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के “दुर्व्यवहार करने वाला कोई भी बख्शा नहीं जाएगा” के कड़े संदेश के बाद प्रशासन तुरंत हरकत में आया। दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 30 मई को ही पत्र भेजकर सीईओ के निलंबन की अनुशंसा कर दी थी। वायरल वीडियो के जरिए कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही और आम जनता व जनप्रतिनिधियों से अशिष्ट व्यवहार की पुष्टि होने के बाद, संभागीय आयुक्त ने कलेक्टर के प्रस्ताव पर मुहर लगाते हुए रूपेश पांडे को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है।
प्रशासनिक स्तर पर हुई इस कार्रवाई ने जहां एक तरफ सरकार के सख्त तेवरों को दिखाया, वहीं दूसरी तरफ इस मुद्दे ने प्रदेश में सियासी पारा भी गरमा दिया है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरने में जरा भी देर नहीं की।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस घटना का वीडियो साझा करते हुए तीखा हमला बोला। उन्होंने इसे भाजपा राज में प्रशासनिक अराजकता की शर्मनाक तस्वीर करार दिया और तंज कसते हुए लिखा कि तथाकथित सुशासन तिहार में भाजपा विधायक ललित चंद्राकर बेबस होकर मुंह छिपाए खड़े रहे और अधिकारी खुलेआम चुनौती देता रहा।
