कांकेर। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के छोटेबेठिया थाना क्षेत्र अंतर्गत माचपल्ली के जंगलों और पहाड़ी इलाकों में हुई पुलिस-नक्सली मुठभेड़ की दंडाधिकारी (मजिस्ट्रेट) जांच तेज हो गई है। जिला कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर के आदेश पर एसडीएम पखांजूर मनीष देव साहू ने इस मामले की आधिकारिक जांच शुरू कर दी है। इस घटना के संबंध में यदि किसी भी नागरिक के पास कोई लिखित या मौखिक जानकारी, साक्ष्य या गवाही है, तो वे आगामी 2 जून 2026 तक कार्यालयीन समय के भीतर अनुविभागीय दंडाधिकारी पखांजूर के न्यायालय में स्वयं उपस्थित होकर इसे प्रस्तुत कर सकते हैं।
इस संवेदनशील मामले की तह तक जाने के लिए जांच अधिकारी कुल 12 प्रमुख बिंदुओं पर गहराई से पड़ताल कर रहे हैं। जांच के दायरे में मुख्य रूप से घटना की पूरी पृष्ठभूमि और सर्चिंग ऑपरेशन पर निकले सशस्त्र बलों को जारी किए गए विभागीय आदेशों व निर्देशों को शामिल किया गया है। इसके साथ ही प्रशासन इस बात की भी गंभीरता से जांच कर रहा है कि 13 अप्रैल 2026 को हुई यह मुठभेड़ क्या वास्तव में प्रतिबंधित माओवादियों द्वारा सुनियोजित और किसी बड़ी साजिश का हिस्सा थी।
मजिस्ट्रेट जांच में मारे गए नक्सलियों की पहचान, उनके आपराधिक इतिहास और उनकी मौत के सटीक कारणों का भी विश्लेषण किया जा रहा है। इसके लिए मृत माओवादियों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट, डॉक्टरों के चिकित्सकीय अभिमत और मौत के आधारभूत कारकों को आधार बनाया गया है। इसके अलावा, इस पूरी घटना के दौरान पुलिस बल या आम नागरिकों को हुई किसी भी प्रकार की जन-धन की हानि, और मौके से बरामद की गई हथियार व अन्य सामग्रियों की जब्ती सूची का भी बारीक निरीक्षण किया जा रहा है।
इस पूरी न्यायिक प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए स्थानीय ग्रामीणों के बयानों, पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर, विवेचना रिपोर्ट और कानूनी धाराओं को भी रिकॉर्ड में लिया जा रहा है। जांच अधिकारी द्वारा जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति, समंस और अन्य प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष स्रोतों से मिलने वाली हर छोटी-बड़ी जानकारी को इस जांच का हिस्सा बनाया गया है, ताकि मुठभेड़ की वास्तविक सच्चाई सामने आ सके।
