कोरबा। त्रिस्तरीय पंचायत उपचुनाव के तहत होने जा रहा सलिहाभांठा का सरपंच चुनाव इस समय पूरे क्षेत्र में कौतूहल और चर्चा का केंद्र बन गया है। करीब एक साल से खाली पड़े इस पद के लिए होने जा रहा यह मुकाबला बेहद खास है, क्योंकि इस बार चुनावी बिसात पर कोई बाहरी नहीं, बल्कि पूर्व गृह मंत्री ननकीराम कंवर के परिवार के ही दो सदस्य आमने-सामने हैं। इस पारिवारिक और राजनीतिक मुकाबले ने चुनाव को ‘भांजा बहू बनाम भतीजा’ की दिलचस्प जंग में तब्दील कर दिया है, जहां एक तरफ पुराना तजुर्बा है तो दूसरी तरफ युवाओं की नई सोच।
राजनीतिक रूप से बेहद रसूखदार माने जाने वाले इस क्षेत्र की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है, क्योंकि यह गांव पूर्व सांसद स्वर्गीय डॉ. बंशीलाल महतो और पूर्व गृह मंत्री ननकीराम कंवर का गृह ग्राम है। इस पंचायत की सत्ता पर लंबे समय से इसी परिवार का दबदबा रहा है। वर्ष 2025 के चुनावों से पहले तक प्रभा देवी कंवर यहाँ की सरपंच थीं और उनसे पहले उनके पति रामप्रसाद कंवर ने इस जिम्मेदारी को संभाला था। लगातार दो योजनाओं तक इस परिवार ने नेतृत्व किया, विकास के दावे भी हुए, लेकिन कुछ बुनियादी जरूरतें अब भी अधूरी हैं जिन्हें चुनावी मुद्दा बनाया जा रहा है।
इस बार मैदान में उतरीं पूर्व सरपंच प्रभा देवी जहां अपने पुराने प्रशासनिक अनुभव और बीते कार्यकाल के कामों के दम पर दोबारा जनता का भरोसा जीतने की कोशिश कर रही हैं, वहीं उनका सीधा मुकाबला पूर्व गृह मंत्री के सगे भतीजे विजय कंवर से है। विजय कंवर पंचायत के सर्वांगीण विकास के एक बिल्कुल नए विजन और युवा सोच के साथ मैदान में डटे हैं। दोनों ही प्रत्याशी गांव-गांव घूमकर अपनी गोटियां फिट करने और माहौल को अपने पक्ष में करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
इस उपचुनाव की नौबत एक बेहद भावुक पृष्ठभूमि के बाद आई है। दरअसल, पिछले मुख्य चुनाव में बदलाव की बयार चली थी और ग्रामीणों ने बड़ी उम्मीदों के साथ युवा प्रत्याशी नवरंगलाल कंवर को अपना सरपंच चुना था। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था; जीत के महज तीन महीने बाद ही उनका अचानक निधन हो गया। व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए सर्वसम्मत फैसले के तहत रामप्रसाद कंवर को कार्यवाहक सरपंच बनाया गया था, और तब से यहाँ कार्यवाहक व्यवस्था ही चल रही थी।
इस चुनाव का एक और सबसे दिलचस्प और ऐतिहासिक पहलू यह है कि पंचायत के इतिहास में पहली बार मुख्य ग्राम सलिहाभांठा से एक भी उम्मीदवार मैदान में नहीं उतरा है। इस पंचायत के करीब 60 फीसदी मतदाता इसी मुख्य गांव में रहते हैं, लेकिन इस बार नेतृत्व की चाबी आश्रित ग्राम बंधवाभांठा के प्रत्याशियों के पास है। शुरुआत में कयास लगाए जा रहे थे कि यह चुनाव निर्विरोध संपन्न हो जाएगा, लेकिन बंधवाभांठा में किसी एक नाम पर सहमति न बन पाने के कारण आखिरकार मतदान की स्थिति पैदा हो गई।
अब इस पंचायत के भविष्य का फैसला 1 जून को सुबह 7 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच होने वाले मतदान से होगा, जिसके लिए दोनों गांवों में पोलिंग बूथ तैयार किए जा चुके हैं। चुनाव में कुल 1456 मतदाता अपने अधिकार का प्रयोग करेंगे, जिनमें 745 पुरुष और 711 महिला मतदाता शामिल हैं। चूंकि निर्णायक 60 फीसदी वोट बैंक मुख्य ग्राम सलिहाभांठा के पास है, इसलिए यह साफ है कि जीत और हार का फैसला इसी गांव के रुख से तय होगा। क्षेत्र की जनता की निगाहें अब इसी बात पर टिकी हैं कि वे एक बार फिर आजमाए हुए अनुभवी चेहरे को चुनते हैं या बदलाव की नई बयार पर दांव लगाते हैं।
