बलरामपुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर में सड़क किनारे भारी मात्रा में गरीबों को बांटा जाने वाला सरकारी चना सड़ी-गली अवस्था में मिलने से हड़कंप मच गया है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत राशन दुकानों के माध्यम से हितग्राहियों को मिलने वाला यह अनाज खुले में फेंका हुआ पाया गया, जिसने खाद्य विभाग और राशन दुकानों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला सामने आते ही विभिन्न मीडिया माध्यमों की खबरों पर संज्ञान लेते हुए खाद्य अधिकारी ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद खाद्य विभाग और राजस्व विभाग की एक संयुक्त टीम ने तत्काल मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। खाद्य निरीक्षक रामानुजगंज और स्थानीय पटवारी द्वारा ग्राम पंचायत कलिकापुर के नीलकंठपुर मोड़ के समीप घटना स्थल का बारीकी से निरीक्षण किया गया।
जांच के दौरान टीम को सड़क किनारे लगभग 15 बोरियों में बंद, एक-एक किलोग्राम के पैकेटों में सड़ा-गला चना बरामद हुआ। इन पैकेटों पर सितंबर 2024 की पैकिंग तिथि अंकित थी, जो स्पष्ट रूप से शासकीय आपूर्ति का हिस्सा थे। संयुक्त जांच दल ने जब मौके पर मौजूद ग्रामीणों से पूछताछ की, तो किसी भी व्यक्ति या संस्था द्वारा इस तरह अनाज फेंके जाने के संबंध में कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी। टीम ने मौके पर उपलब्ध चने का कड़ाई से परीक्षण किया, जिससे यह पूरी तरह साफ हो गया कि यह अनाज शासकीय उचित मूल्य दुकान के माध्यम से ही गरीबों में वितरित किया जाना था। इस मामले में आवश्यक साक्ष्य और तथ्य संकलित करते हुए जांच टीम द्वारा मौके पर ही पंचनामा तैयार करने की कार्रवाई पूरी की गई।
घटनास्थल से जब्त किए गए चने के सभी पैकेटों को सुरक्षित रखने के लिए ग्राम पंचायत कलिकापुर के रोजगार सहायक को सुपुर्द कर दिया गया है। फिलहाल, इस पूरे मामले की जांच और आगामी आवश्यक कानूनी कार्रवाई नियमानुसार तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है। इस बीच जिला प्रशासन ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा है कि शुरुआती जांच में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत चने के नियमित वितरण में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या स्थानीय गोदामों में खाद्यान्न की कमी की पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन द्वारा पूरे क्षेत्र में राशन वितरण की कड़ी निगरानी की जा रही है ताकि पात्र हितग्राहियों को उनका राशन नियमित रूप से मिलता रहे। इसके साथ ही, सरकारी अनाज को इस तरह बर्बाद करने और फेंकने वाले अज्ञात आरोपियों के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने के सख्त निर्देश दे दिए गए हैं।
