बलरामपुर। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा देशव्यापी स्तर पर संचालित ‘ज्ञानभारतम पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान’ के अंतर्गत बलरामपुर जिले से लगातार बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक सामग्रियां सामने आ रही हैं। जिले के विभिन्न क्षेत्रों के जागरूक नागरिकों और पांडुलिपि संरक्षकों द्वारा स्वप्रेरणा से प्रशासन को इसकी सूचना दी जा रही है। इन सूचनाओं के आधार पर प्रशिक्षित सर्वेयरों द्वारा इन प्राचीन धरोहरों का दस्तावेजीकरण करने के साथ ही इन्हें ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड भी किया जा रहा है।
इसी कड़ी में रामानुजगंज के मध्य बाजार के पास रहने वाले रामेश्वर प्रसाद गुप्ता के घर एक अत्यंत दुर्लभ और ऐतिहासिक पांडुलिपि प्राप्त हुई है। इस बहुमूल्य धरोहर का अवलोकन करने के लिए ज्ञानभारतम पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान की जिला स्तरीय समिति के नोडल अधिकारी रामपथ यादव, सहायक नोडल श्री संजय कुमार गुप्ता और जिला ग्रंथपाल राजकुमार शर्मा के साथ गुप्ता परिवार के निवास स्थान पर पहुंचे। इस दौरान एंथ्रोपोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, जगदलपुर से आए जिला प्रभारी अधिकारी हरनेक सिंह ने इस दुर्लभ पांडुलिपि को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड करने का महत्वपूर्ण कार्य संपन्न किया।
सदियों पुरानी इस पारिवारिक धरोहर को सहेजकर रखने वाले रामेश्वर प्रसाद गुप्ता ने बताया कि यह पांडुलिपि उनके दादाजी लक्ष्मी प्रसाद रौनियार द्वारा आज से करीब 96 वर्ष पूर्व लिखी गई थी। इस ऐतिहासिक दस्तावेज में न केवल उनके वंश वृक्ष (Family Tree) को खूबसूरती से चित्रित किया गया है, बल्कि इसमें तत्कालीन समाज, संस्कृति और भूगोल की भी गहरी झलक मिलती है। इस पांडुलिपि में मां शारदा की भक्ति वंदना, रामानुजगंज की जीवनदायिनी कन्हर नदी में आई ऐतिहासिक बाढ़ का सजीव वर्णन, भैरवी, द्रौपदी का विनय, गजल, दोहा, चौगोला, दादरा और ईश्वर प्रार्थना जैसे विविध विषयों को समाहित किया गया है। हस्तलिपि की यह सुंदरता और विशिष्टता देखने वालों को आश्चर्यचकित कर देती है।
इस महत्वपूर्ण खोज पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए नोडल अधिकारी रामपथ यादव ने कहा कि ज्ञानभारतम अभियान वास्तव में भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, लोक संस्कृति, पुरातात्त्विक धरोहरों, पांडुलिपियों और जनजातीय विरासत के संरक्षण व संवर्धन का एक क्रांतिकारी कदम है। गुप्ता परिवार द्वारा इस अमूल्य धरोहर को इतने वर्षों तक सुरक्षित रखना सराहनीय है और यह नई पीढ़ी को हमारी समृद्ध सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में मददगार साबित होगा।
