धमतरी। रूढ़िवादी सामाजिक परंपराओं की दीवारों को ढहाकर एक मां ने न केवल अपने बेटे के सिर पर सेहरा सजाया, बल्कि समाज के सामने नारी सम्मान और अधिकारों की एक नई इबारत भी लिख दी। धमतरी जिले के कुरुद ब्लॉक अंतर्गत ग्राम गोजी की रहने वाली पार्वती साहू ने पति के निधन के बाद समाज द्वारा थोपी जाने वाली बंदिशों को दरकिनार करते हुए अपने पुत्र के विवाह में स्वयं मौर सौंपने की रस्म अदा की। विधवा महिलाओं को मांगलिक कार्यों से दूर रखने वाली दकियानूसी सोच पर चोट करने वाले इस साहसिक कदम के लिए सोमवार को उन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया गया। एससी, एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यक समाज द्वारा ‘छत्तीसगढ़ महतारी मंदिर’ में आयोजित ‘पुरखा के सुरता’ कार्यक्रम में पार्वती साहू का यह सम्मान हर महिला के आत्मसम्मान का उत्सव बन गया।
इस वैचारिक और प्रेरणादायी गरिमामयी समारोह की चमक उस समय और बढ़ गई जब रायपुर संभाग के कमिश्नर महादेव कावरे तथा सतनामी समाज धमतरी के जिला अध्यक्ष भाव सिंह डहरे ने लेखक एवं शिक्षाविद विनोद कुमार कोसले की बहुप्रतीक्षित पुस्तक ‘न्याय का इंतजार’ का विमोचन किया। वैचारिक चेतना से ओतप्रोत इस कार्यक्रम की शुरुआत सामूहिक रूप से भारतीय संविधान की उद्देशिका के वाचन के साथ हुई, जिसने उपस्थित जनसमुदाय में अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति एक नई ऊर्जा का संचार किया। शिक्षा और सामाजिक सुधार को समर्पित इस मंच पर न केवल अतीत और वर्तमान का सम्मान हुआ, बल्कि भविष्य की नींव भी रखी गई। इसी कड़ी में शैक्षणिक सत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कक्षा 10वीं और 12वीं के होनहारों तथा नवोदय विद्यालय में चयनित मेधावी विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र देकर उनका हौसला बढ़ाया गया। साथ ही, समाज को नई दिशा देने वाले वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता व साहित्यकार पंडित शंकर दादा और नशामुक्ति व कुरीतियों के उन्मूलन में अग्रणी भूमिका निभाने वाले ग्राम नवागांव थूहा, बंगोली और उमरदा नवागांव के कार्यकर्ताओं को भी सम्मानित किया गया।
मंच से प्रबुद्ध वक्ताओं ने समाज को प्रगति के पथ पर आगे बढ़ने का मंत्र दिया। पुस्तक के लेखक विनोद कोसले ने युवाओं में जोश भरते हुए कहा कि शिक्षा ही वह अचूक हथियार है जिससे सम्मान और सर्वोच्च पद हासिल किए जा सकते हैं। उन्होंने युवाओं को यूपीएससी में चयनित डायमंड ध्रुव का उदाहरण देते हुए राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, आईएएस और आईपीएस जैसे शीर्ष पदों पर पहुंचने का लक्ष्य तय करने के लिए प्रेरित किया। वहीं मुख्य अतिथि कमिश्नर महादेव कावरे ने शिक्षा को विकास का मूल मंत्र और सामाजिक प्रगति की सबसे मजबूत नींव बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे भाव सिंह डहरे ने सामाजिक एकजुटता पर बल देते हुए छत्तीसगढ़ की पारंपरिक ‘मितानी प्रथा’ जैसी खूबसूरत कड़ियों को सहेजने और आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनने के लिए देवलाल भारती, एस. गावस्कर, अश्वनी बंजारा, एस.एल. मात्रे, अनिल बनज, स्नेहा लता हुमने, अमन हुमने, जी.आर. बंजारे ज्वाला, सुशीला देवी वाल्मीकि, पालनहार मेश्राम, जे.एल. ध्रुव, गेवाराम नेताम, मीणा कुर्रे, एम.एल. बघेल, नंदकुमार ध्रुव, रविंद्र साहू, कृषि वैज्ञानिक सर खरे और संतोष जांगड़े सहित बड़ी संख्या में प्रबुद्ध नागरिक और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम को एक सूत्र में पिरोने का काम संचालक द्वय शैलेश कुर्रे ‘विद्रोही’ और नालेश कुर्रे ने अपनी ओजस्वी वाणी से किया, जबकि अंत में रूपेंद्र बघेल ने आभार प्रदर्शन कर समारोह का सफल समापन किया।
