जांजगीर चांपा। पामगढ़ विधायक शेषराज हरबंश द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद प्रदेश के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव का बड़ा बयान सामने आया है। मीडिया के सवालों पर मंत्री यादव ने पामगढ़ विधायक के आरोपों पर सीधा पलटवार करते हुए कहा कि सुशासन तिहार के दौरान मुख्यमंत्री का कार्यक्रम पूरी तरह औचक निरीक्षण आधारित होता है, जिसमें कोई पूर्व निर्धारित प्रोटोकॉल नहीं रहता। ऐसे में किसी जनप्रतिनिधि को जानबूझकर रोके जाने का आरोप अनुचित और भ्रामक है। यह बयान शिक्षा मंत्री जांजगीर सामाजिक कार्यक्रम में शामिल होने जांजगीर पहुंचे थे।।
शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन तिहार कार्यक्रम का उद्देश्य सीधे जनता से संवाद करना और योजनाओं की जमीनी हकीकत देखना है। यह कोई पूर्व नियोजित राजनीतिक मंच नहीं होता, बल्कि प्रशासनिक निरीक्षण की प्रक्रिया होती है।
दरअसल, कोसला ग्राम में आयोजित सुशासन तिहार कार्यक्रम को लेकर पामगढ़ विधायक शेषराज हरबंश ने आरोप लगाया था कि कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने से उन्हें कलेक्टर और एसपी द्वारा रोका गया। विधायक शेषराज हरबंश ने इसे चुने हुए जनप्रतिनिधि का अपमान करार देते हुए कहा कि प्रशासन सरकार के एजेंट की तरह काम कर रहा है।
हालांकि, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि प्रशासन ने किसी के साथ भेदभाव नहीं किया। उन्होंने दो टूक कहा कि सुशासन तिहार में न तो किसी को बुलाया जाता है और न ही रोका जाता है। ऐसे आरोप केवल राजनीतिक भ्रम फैलाने के लिए लगाए जा रहे हैं।
इस पूरे मामले ने जांजगीर-चांपा की राजनीति को गरमा दिया है। सवाल अब यह है कि क्या यह मामला प्रशासनिक प्रक्रिया का है या फिर राजनीतिक टकराव का नया अध्याय, एक ओर विधायक सम्मान और अधिकारों की बात कर रहे हैं, तो दूसरी ओर सरकार के मंत्री इसे नियमों और व्यवस्था का हिस्सा बता रही है।
फिलहाल, सुशासन तिहार के नाम पर उठा यह विवाद सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव का बड़ा मुद्दा बनता नजर आ रहा है।
