बलरामपुर..(कृष्णमोहन कुमार)..प्रदेश में एक तरफ सरकार सुशासन तिहार मना रही है..ताकि समाज के अंतिम पंक्ति तक सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लोगो को आसानी से मिल सके.. सरकारी अधिकारी लोगों की समस्याओं से मुखातिब हो..लेकिन बलरामपुर जिले के दूरस्थ अंचल नहलूपाठ का हाल कुछ अलग ही नजर आता है..गांव से 7 किलोमीटर दूर सुशासन तिहार का समाधान शिविर लगा था,और गांव के लोगों को पीने के लिए स्वच्छ पानी भी नसीब नहीं हो पा रहा गांव के 28 घरों के लोग एक खेत के मेड किनारे गड्ढे खोदकर पानी पीने को मजबूर है..और तो और हालिया दिनों में गांव में शादी हुई तो गांव वालों ने उसी गड्ढे का पानी पिलाकर बारातियों का स्वागत भी किया..इस बीच वर और वधु पक्ष में कहासुनी की नौबत भी आ गई थी..हालांकि सरगुजा सांसद चिंतामणि महराज ने इस पर संज्ञान लिया और अधिकारियों को फटकार लगाते हुए आश्वस्त किया की गांव के लोगों को जल्द ही पीने के लिए स्वच्छ पानी मुहैय्या हो जाएगा!..
दरअसल कुसमी ब्लॉक का नहलूपाठ, चटनियां ग्राम पंचायत का हिस्सा है..जहां कभी लाल आतंक का साया था..और जैसे ही 2008 में इस क्षेत्र से नक्सलवाद का खात्मा हुआ..लोग मुख्य धारा से जुड़ने लगे..लेकिन पंचायत स्तर के जनप्रतिनिधियों और कर्मचारियों की उपेक्षा का दंश आज भी बेबस ग्रामीण झेलने को मजबूर है..ग्रामीण पहले निस्तारी और पेयजल के लिए गांव में बनाए गए कुएं पर आश्रित थे..लेकिन पिछले कुछ महीने से कुएं का पानी दूषित हो गया है..कुएं के लाल पानी को ग्रामीण उपयोग में नहीं लाते है.. ग्रामीणों की इस समस्या को दूर करने एक से डेढ़ महीने पहले ग्राम पंचायत ने दो जगहों पर नलकूप खनन का कार्य कराया था..जलस्त्रोत का स्तर भी अच्छा होने से नलकूप में पानी भी पर्याप्त मात्रा में मिला..लेकिन पंचायत सचिव की मनमानी ने सब किए कराए पर पानी फेर दिया है.. नलकूप में हैंडपंप के उपकरण ही नहीं लगाए गए है..जिससे पानी निकाला जा सके..अब ग्रामीण सिस्टम के आगे बेबस और लाचार नजर आ रहे है!.
वही पास ही के गांव चांदो में आयोजित समाधान शिविर में पहुंचे सरगुजा सांसद चिंतामणि महराज को मीडिया के माध्यम से यह जानकारी मिली..तो उन्होंने फौरी तौर पर पंचायत और पीएचई विभाग के अधिकारियों को फटकार लगाते हुए..ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की हिदायत दी है..
बहरहाल सांसद के पहल पर नहलूपाठ वासियों को स्वच्छ पेयजल तो मिल जाएगा..लेकिन जिले में अब भी कई ऐसे गांव है..जहां ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल तक मुनासिब नहीं है..मैदानी अमला अधिकारियों को गुमराह करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ता है..ऐसे में अब स्थिति ऐसी है की धरातल पर कुछ और फाइलों पर कुछ और दावें नजर आते है!.
