दमोह। मध्य प्रदेश के दमोह-जबलपुर मुख्य मार्ग पर सोमवार की रात सन्नाटा पसरने ही वाला था कि पॉलिटेक्निक कॉलेज के सामने अचानक मची हलचल ने भ्रष्टाचार के एक काले खेल का पर्दाफाश कर दिया। सागर लोकायुक्त पुलिस ने एक बेहद गोपनीय और सटीक कार्रवाई करते हुए शिक्षा विभाग के तीन कर्मचारियों को 80 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। भ्रष्टाचार का यह जाल एक प्राथमिक शिक्षक को निलंबन से बहाल करने और उसकी विभागीय जांच को रफा-दफा करने के नाम पर बुना गया था, लेकिन लोकायुक्त की मुस्तैदी ने इसे नेस्तनाबूद कर दिया।

घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब पटेरा स्थित उत्कृष्ट विद्यालय के प्राथमिक शिक्षक नवेंद्र कुमार आठया ने लोकायुक्त कार्यालय सागर में गुहार लगाई। उन्होंने शिकायत दर्ज कराई कि उनकी बहाली के बदले विभाग के ही कुछ लोग उनसे मोटी रकम की मांग कर रहे हैं। शिकायत की पुष्टि होते ही लोकायुक्त की टीम ने जाल बिछाया और सोमवार रात करीब 8:00 बजे जैसे ही आरोपियों ने रिश्वत की रकम हाथ में ली, पुलिस ने घेराबंदी कर उन्हें दबोच लिया। पकड़े गए आरोपियों में माध्यमिक शिक्षक अनिल कुमार साहू, जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के सहायक ग्रेड-2 मनोज कुमार श्रीवास्तव और सहायक ग्रेड-3 नीरज कुमार सोनी शामिल हैं।

सड़क पर हुई इस नाटकीय कार्रवाई के दौरान लोकायुक्त दल ने मौके पर ही नकदी जब्त कर पंचनामा तैयार किया। निरीक्षक मंजू किरण तिर्की और रंजीत सिंह के नेतृत्व में चली यह कार्रवाई देर रात तक जारी रही, जिसमें आरोपियों से गहन पूछताछ की गई। शिक्षा के मंदिर से जुड़े इन कर्मचारियों की इस करतूत ने विभाग की छवि पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। फिलहाल तीनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और मामले की गहराई से जांच की जा रही है।
