राजगढ़. मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने आधुनिक समाज और प्रशासन के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. यहाँ भोजपुर थाना क्षेत्र के कुशालपुरा गांव में महज 9 साल के बालक और 8 साल की बालिका का विवाह करा दिया गया, लेकिन उनकी यह ‘बचपन की गृहस्थी’ सोशल मीडिया पर वायरल होते ही बिखर गई. हल्दी, मेहंदी और बारात की रस्मों के वीडियो जब इंटरनेट पर जंगल की आग की तरह फैले, तो सो रहा प्रशासन अचानक जाग उठा.
महिला एवं बाल विकास विभाग और पुलिस की टीम ने गांव पहुंचकर जब मामले की तफ्तीश की, तो बाल विवाह की पुष्टि हुई. पुलिस ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए न केवल मासूमों के माता-पिता, बल्कि इस अपराध में शामिल टेंट संचालक, घोड़ी वाले, हलवाई, प्रिंटिंग प्रेस संचालक और विधि-विधान से फेरे करवाने वाले पंडित के खिलाफ भी अपराध क्रमांक 120/2026 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है.
यह कार्रवाई बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 की धारा 10 और 11 के तहत की गई है, जो इस कुप्रथा में सहयोग करने वाले हर व्यक्ति को अपराधी मानती है. हैरानी की बात यह है कि एक तरफ सरकार और अहिंसा वेलफेयर सोसायटी जैसी संस्थाएं जागरूकता अभियान चला रही हैं, वहीं दूसरी ओर समाज के भीतर दबी यह कुप्रथा अब भी अपनी जड़ें जमाए हुए है.
राजगढ़ में ही एक अन्य मामला करनवास थाने में भी सामने आया है, जहाँ 9 साल की बच्ची की सगाई जबरन कर दी गई और अब शादी तोड़ने के बदले 9 लाख रुपए की मांग की जा रही है. इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बाल विवाह को रोकने के लिए केवल सरकारी आदेश काफी नहीं हैं, बल्कि सामाजिक चेतना की भी सख्त जरूरत है. पुलिस प्रशासन ने अब आम जनता से अपील की है कि वे ऐसे आयोजनों का हिस्सा न बनें और जानकारी मिलते ही तुरंत सूचित करें.
