जगदलपुर। भागदौड़ भरी आधुनिक जिंदगी के बीच परिवार की गर्माहट और रिश्तों की मिठास को फिर से जीवंत करने का अनोखा प्रयास गुरुवार को जिले की आंगनबाड़ी केंद्रों में देखने को मिला, जहां आयोजित ‘दादा-दादी, नाना-नानी खेल उत्सव’ ने बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर चेहरे पर मुस्कान बिखेर दी। इस आयोजन में 126 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
उत्सव की शुरुआत बेहद भावनात्मक माहौल में हुई। नन्हे बच्चों ने पारंपरिक अंदाज में अपने दादा-दादी और नाना-नानी का आरती, तिलक और फूलों से स्वागत किया। इसके बाद शुरू हुआ खेल और मनोरंजन का ऐसा सिलसिला, जिसमें उम्र की सीमाएं पूरी तरह टूटती नजर आईं। म्यूजिक चेयर, रस्साकशी और चम्मच दौड़ जैसी प्रतियोगिताओं में बुजुर्गों ने बच्चों जैसी ऊर्जा और उत्साह दिखाते हुए बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
कार्यक्रम में डांस, पेपर कप गेम और ब्लॉक बनाने जैसी गतिविधियों में बच्चों और बुजुर्गों की शानदार जुगलबंदी ने सभी का दिल जीत लिया। सबसे ज्यादा भावुक और रोमांचक पल तब आया, जब आंखों पर पट्टी बांधकर अपने बच्चों को पहचानने की गतिविधि आयोजित की गई। इस अनोखे खेल ने यह साबित कर दिया कि रिश्ते केवल आंखों से नहीं, बल्कि दिल और स्पर्श से भी पहचाने जाते हैं। बंद आंखों के बावजूद बुजुर्गों ने अपने नाती-पोतों को पहचान लिया, तो पूरा परिसर तालियों और खुशियों से गूंज उठा।
तीन दिनों तक चले इस उत्सव ने एक मजबूत संदेश दिया कि खुशियां किसी उम्र की मोहताज नहीं होतीं। जहां बच्चों को अपने बड़ों का स्नेह मिला, वहीं बुजुर्गों ने भी बचपन की मासूमियत को फिर से जी लिया। यह आयोजन न केवल मनोरंजन का माध्यम बना, बल्कि पीढ़ियों के बीच रिश्तों की डोर को और मजबूत करने का प्रेरणादायक उदाहरण भी साबित हुआ।
