बलरामपुर..(कृष्णमोहन कुमार)..जिले में आज मुख्यमंत्री सामूहिक कन्या विवाह योजना के अंतर्गत 150 जोड़ो का विवाह कार्यक्रम सम्पन्न होने जा रहा है, और इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री वर्चुअल माध्यम से जुड़ेंगे. सामूहिक विवाह की तैयारियों के लिए स्थानीय प्रशासन और महिला बाल विकास विभाग ने दिन दोगुनी रात चौगुनी कर दी थी, लेकिन विवाह समारोह में उस समय राजनीतिक हल चल मच गई. जब सत्तासीन भाजपा के पदाधिकारी वैवाहिक कार्यक्रम में नाराज फूफा की तर्ज पर नाराज हो गए, और मंच में जाने के बजाए नीचे लगे दर्शक दीर्घा की कुर्सियों में बैठकर विरोध प्रदर्शन किया. नाराज माननीयों की नाराजगी का कारण यह था कि आमंत्रण पत्र में माननीयों का नाम गायब था. इधर माननीयों को मनाने स्थानीय प्रशासन हरकत में आया और माननीयों को मना लिया गया. जिसके बाद शादी समारोह कार्यक्रम के अंतिम पड़ाव की बढ़ा.
मुख्यमंत्री सामूहिक कन्या विवाह के तहत वैवाहिक कार्यक्रम में पहले कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम, सरगुजा सांसद चिंतामणि महराज को बतौर अतिथि शामिल होना था. लेकिन अपरिहार्य कारणों से वे कार्यक्रम में सम्मिलित नहीं हो सके. जिसके बाद सामरी विधायक उदेश्वरी पैंकरा ने नवदंपत्तियों को आशीर्वाद दिया. कार्यक्रम की रूपरेखा प्रोटोकॉल के अनुरूप थी और आमंत्रण पत्र में सांसद, विधायको, जिला पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, जनपद अध्यक्ष, नगर पालिका अध्यक्ष के नाम अंकित थे. नाराजगी का कारण भी वही प्रोटोकॉल ही बना. आमंत्रण पत्र में नाम नही होने को लेकर नाराजगी जाहिर करते हुए भाजपा जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश जायसवाल, पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य कृष्णा गुप्ता, जनपद उपाध्यक्ष बबली संबल, नगर पालिका उपाध्यक्ष दिलीप सोनी मंच पर नहीं पहुंचे और दर्शक दीर्घा में बैठकर विरोध जताते दिखे.

बहरहाल, नाराज माननीयों को समय रहते स्थानीय प्रशासन ने मनाने की कवायद तेज की और अंतोगत्वा उन्हें मना लिया. लेकिन सवाल यह है कि जब कार्यक्रम सरकारी हो तब माननीय पदाधिकारियों का नाम आमंत्रण पत्र में कैसे हो सकता है? जिस आयोग का कार्यकाल एक सीमित समय के लिये था उसका क्या हुआ. यह भी समझ से परे है. खैर वैवाहिक कार्यक्रमों में इस तरह की नोंक झोंक आम बात होती है, लेकिन सरकारी आयोजन में इस तरह की नाराजगी इसे समझना पड़ेगा.
