फटाफट डेस्क। दक्षिण-पूर्वी बांग्लादेश में मूसलाधार बारिश काल बनकर टूटी है। बुधवार दोपहर उखिया के रोहिंग्या कैंप-5 (ब्लॉक ए-3) स्थित एक बालिका हिफ्ज मदरसे पर अचानक पहाड़ी का विशाल मलबा गिर गया, जिसकी चपेट में आने से सात छात्राओं और एक शिक्षक सहित आठ लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। मलबे के भारी दबाव से मदरसे की दीवार ताश के पत्तों की तरह ढह गई। हादसे के वक्त क्लासरूम में करीब 40 बच्चियां मौजूद थीं, जिससे वहां चीख-पुकार मच गई। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग, आर्म्ड पुलिस बटालियन और रोहिंग्या स्वयंसेवकों ने संयुक्त रूप से युद्धस्तर पर बचाव अभियान शुरू किया। देर शाम तक मलबे से 13 लोगों को बाहर निकाला गया, जिनमें से चार ने मौके पर ही और चार अन्य ने अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया। हादसे में सुरक्षित बचाई गई 30 छात्राओं में से पांच की हालत गंभीर है, जिन्हें कुतुपालोंग फ्रेंडशिप हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, जान गंवाने वाली बच्चियों में राशिदा बेगम (13), उम्मे नेजातुल (13), उम्मे सलमा (12) और उमाइसा बीबी (13) शामिल हैं, जिनमें से दो बच्चियां एक ही परिवार की थीं।
इस भीषण हादसे के बीच कॉक्स बाजार और चटगांव में भी लगातार हो रही बारिश ने हालात बेहद नाजुक कर दिए हैं। निचले इलाके पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं और समूचे क्षेत्र में नए सिरे से भूस्खलन का खतरा मंडरा रहा है। बीते दो दिनों के भीतर कॉक्स बाजार के अलग-अलग हिस्सों में मिट्टी धंसने से महिलाओं और बच्चों समेत कम से कम 10 और लोगों की मौत की खबर है। वहीं चटगांव में भी आसमानी आफत ने भारी तबाही मचाई है, जहां रंगुनिया में पहाड़ी ढहने से एक महिला, रहमान नगर में दीवार गिरने से एक युवक और चश्मा हिल में 12 वर्षीय बच्ची की मौत हो गई। एक अन्य हृदयविदारक घटना में सीताकुंड के जंगल सलीमपुर इलाके में मिट्टी के नीचे दबने से महज 10 महीने के मासूम को अपनी जान गंवानी पड़ी। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अकेले चटगांव शहर में 26 पहाड़ियां ऐसी हैं, जो अत्यधिक जोखिम वाले क्षेत्र में आती हैं। इन खतरनाक ढलानों पर वर्तमान में 6,500 से अधिक परिवार रह रहे हैं, जिन पर हर पल मौत का साया मंडरा रहा है।
बढ़ते खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने इन संवेदनशील पहाड़ियों को पांच निगरानी जोन में बांटकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। कार्यकारी मजिस्ट्रेटों और सहायक भूमि आयुक्तों के नेतृत्व में लगभग 150 स्वयंसेवकों को तैनात किया गया है, जो लाउडस्पीकर के जरिए लगातार मुनादी कर लोगों को तुरंत असुरक्षित ढलानों को खाली करने की अपील कर रहे हैं। प्रभावित रोहिंग्या परिवारों के लिए कॉक्स बाजार में अस्थायी राहत शिविर खोले गए हैं। इस प्राकृतिक आपदा ने पूरे क्षेत्र की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। रेल पटरियों के पूरी तरह पानी में डूब जाने के कारण चटगांव-कॉक्स बाजार रूट पर ट्रेनों का संचालन पूरी तरह ठप है। इसके साथ ही, समुद्र में उठी तेज और ऊंची लहरों के मद्देनजर सुरक्षा कारणों से टेकनाफ-सेंट मार्टिन रूट पर चलने वाली फेरी सेवाओं को भी अगले आदेश तक रोक दिया गया है।
