नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद एक बड़ा कदम उठाते हुए 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है। आयोग द्वारा सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया गया है कि पुनरीक्षण के दौरान जिन योग्य नागरिकों के नाम मतदाता सूची से कट गए हैं या छूट गए हैं, उन्हें दोबारा जोड़ा जाए। इसके साथ ही पहली बार मतदान करने वाले 18 वर्ष के युवाओं को भी इस सूची में शामिल करने के लिए एक महीने का सघन अभियान शुरू किया जा रहा है। पश्चिम बंगाल सहित अन्य राज्यों के निर्वाचन अधिकारियों ने भी इस सतत अद्यतन प्रक्रिया की पुष्टि करते हुए क्षेत्रीय अधिकारियों को सक्रिय कर दिया है।
इस पूरी प्रक्रिया का आधार बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) का जमीनी सत्यापन होगा। आयोग के निर्देशानुसार, बीएलओ पहले की मतदाता सूची और हाल ही में जारी अंतिम सूची का मिलान करेंगे, जिससे उन नामों की पहचान होगी जो ड्राफ्ट या दावे-आपत्तियों के दौरान बाहर हो गए थे। इसके बाद बीएलओ चिन्हित नागरिकों के घर-घर जाकर सत्यापन करेंगे और यदि वे उस पते पर निवास कर रहे हैं, तो मौके पर ही उनसे फॉर्म 6 भरवाया जाएगा। काम को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए प्रत्येक बीएलओ को प्रति सप्ताह 20 से 25 घरों को कवर करने का लक्ष्य दिया गया है ताकि एक माह के भीतर समूची प्रक्रिया पूरी हो सके।
चुनाव प्रक्रिया को पूर्ण पारदर्शी और समावेशी बनाने के लिए आयोग ने समाज के वंचित वर्गों पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया है। इसके तहत नाइट शेल्टरों, मजदूर कॉलोनियों और बेघर आबादी के लिए विशेष बूथ-स्तरीय कैंप लगाए जाएंगे, जबकि स्कूल-कॉलेजों और स्वीप (SVEEP) कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को जागरूक किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, पूरी प्रक्रिया में राजनीतिक दलों को भी साझेदार बनाया गया है। बीएलओ द्वारा तैयार सूची मान्यता प्राप्त दलों के बूथ लेवल एजेंटों के साथ साझा की जाएगी और अंतिम निर्णय जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 तथा निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 के तहत निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) द्वारा लिया जाएगा। दैनिक समीक्षा के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी पात्र नागरिक मताधिकार से वंचित न रहे।
