नई दिल्ली। रसोई में अचानक गैस खत्म होने का डर, हर महीने बुकिंग की मशक्कत और डिलीवरी का लंबा इंतजार अब जल्द ही गुजरे जमाने की बात बन सकता है। केंद्र सरकार देश के करोड़ों परिवारों को पारंपरिक एलपीजी सिलेंडर की निर्भरता से मुक्त कर सीधे पाइपलाइन से रसोई गैस (PNG) उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसी कड़ी में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) ने आधिकारिक तौर पर ‘National PNG Drive 3.0’ की शुरुआत की है। 1 अक्टूबर 2026 से 31 मार्च 2027 तक चलने वाले इस राष्ट्रव्यापी अभियान का सीधा उद्देश्य देश में 50 लाख नए घरेलू कनेक्शन जोड़ना और 50 लाख नए रजिस्ट्रेशन हासिल करना है।
इस अभियान का दूसरा बड़ा पहलू मौजूदा बुनियादी ढांचे का शत-प्रतिशत उपयोग करना है। देश में करीब 40 लाख ऐसे पीएनजी कनेक्शन हैं जो पहले दिए तो गए थे, लेकिन वर्तमान में निष्क्रिय पड़े हैं। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, नए घरों को पाइपलाइन से जोड़ने के साथ-साथ इन निष्क्रिय कनेक्शनों को दोबारा एक्टिव करना इस अभियान की शीर्ष प्राथमिकता होगी। इसके अलावा, देश में पहले से बिछी 6.88 लाख इंच-किलोमीटर गैस पाइपलाइन नेटवर्क की अतिरिक्त क्षमता का लाभ उठाकर अब बड़े महानगरों के साथ-साथ टियर-2, टियर-3 शहरों और अर्ध-शहरी इलाकों तक सुरक्षित गैस आपूर्ति का विस्तार किया जाएगा।
उपभोक्ताओं के नजरिए से पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) एक बड़ा व्यावहारिक बदलाव लेकर आती है। इसमें न तो भारी सिलेंडर रखने के लिए जगह की जरूरत होती है और न ही गैस खत्म होने पर रीफिलिंग का झंझट। बिजली के मीटर की तरह ही इसमें भी रसोई में मीटर लगाया जाता है, जिससे उपभोक्ता जितनी गैस खर्च करता है, बिल भी सिर्फ उतना ही आता है। सरकार इस पूरी कवायद को ‘वन नेशन, वन गैस ग्रिड’ के विजन को मजबूत करने वाले कदम के रूप में देख रही है। हालांकि, पीएनजी अपनाना किसी परिवार के लिए कितना किफायती रहेगा, यह स्थानीय गैस वितरण कंपनी के कनेक्शन शुल्क और प्रति यूनिट दरों पर भी निर्भर करेगा।
