नागपुर। महाराष्ट्र के नागपुर में मजदूर दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने अपनी बेबाक शैली में राजनीति के गिरते स्तर और जातिगत ध्रुवीकरण पर कड़ा प्रहार किया। वर्तमान दौर की तीखी राजनीतिक बयानबाजी के बीच गडकरी ने स्पष्ट किया कि बुनियादी सुविधाएं और विकास किसी भी व्यक्ति की धार्मिक या जातीय पहचान देखकर भेदभाव नहीं करते।
उन्होंने तर्क दिया कि ईंधन जैसी अनिवार्य आवश्यकताएं समाज के हर वर्ग को समान रूप से प्रभावित करती हैं, इसलिए राजनीति में भी दृष्टि समान होनी चाहिए। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि जिस कीमत पर एक हिंदू को गैस, पेट्रोल और डीजल उपलब्ध होता है, ठीक उसी कीमत पर वह एक मुसलमान को भी मिलता है, क्योंकि आर्थिक नीतियां और विकास के लाभ सर्वव्यापी होते हैं।
नितिन गडकरी ने चुनावी समर में जाति और धर्म के आधार पर होने वाले विभाजनकारी प्रचार से खुद को पूरी तरह अलग रखते हुए इसे समाज के लिए निष्प्रयोज्य बताया। उन्होंने सार्वजनिक जीवन में नेताओं के दोहरे चरित्र और पाखंड को उजागर करते हुए खुलासा किया कि जो नेता मंचों से जाति के नाम पर वोट मांगते हैं, वही बंद दरवाजों के पीछे अपने परिजनों के लिए टिकट की पैरवी करने उनके पास आते हैं।
सामाजिक समरसता पर जोर देते हुए उन्होंने कड़ा रुख अख्तियार किया और चेतावनी भरे लहजे में कहा कि वे जातिवाद की राजनीति करने वालों को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। गडकरी का यह बयान उन परिस्थितियों में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब देश के विभिन्न हिस्सों में चुनावी रणनीतियां अक्सर धार्मिक और जातिगत समीकरणों के इर्द-गिर्द सिमटती नजर आती हैं। उन्होंने अपने स्पष्ट संदेश से यह रेखांकित किया कि समाज का कल्याण विकास आधारित राजनीति में है, न कि विभाजनकारी नारों में।
