सूरजपुर। आजकल शादियों का सीजन हो न हो, लेकिन छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में एक ऐसी शादी हुई है जिसकी चर्चा पूरे देश में हो रही है। यहाँ न तो कोई नामी दूल्हा था और न ही कोई मशहूर दुल्हन, बल्कि मंडप में दूल्हा-दुल्हन बनकर बैठे थे “एक मेंढक और एक मेंढकी!” जी हाँ, प्रतापपुर क्षेत्र के एक गाँव में पूरे रीति-रिवाज, बैंड-बाजे और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यह अनोखी शादी संपन्न कराई गई, जिसे देखने के लिए सैकड़ों ग्रामीणों का हुजूम उमड़ पड़ा।
दरअसल, यह कोई आम शादी या मनोरंजन नहीं था, बल्कि अच्छी बारिश के लिए बरसों पुरानी परंपरा का हिस्सा था। ग्रामीणों का मानना है कि जब मानसून रूठ जाता है, तो मेंढक-मेंढकी का विवाह कराने से वर्षा के देवता इंद्रदेव प्रसन्न होते हैं। इसी अटूट विश्वास के साथ, गाँव के लोगों ने इस बार भी सुख-समृद्धि और अच्छी फसल की कामना के लिए यह आयोजन किया।
इस अनोखी शादी का नजारा बेहद दिलचस्प था। गाँव के बाहर एक बड़े पेड़ के नीचे खुले आसमान में मंडप सजाया गया था। शादी में बच्चे, बूढ़े, युवा और महिलाएँ सभी बढ़-चढ़कर शामिल हुए। डीजे और पारंपरिक बाजों की धुन पर महिलाएँ और बाराती जमकर थिरकते नजर आए। शादी के दौरान पूरे वैदिक मंत्र पढ़े और रीति-रिवाज से दोनों का विवाह संपन्न कराया।
छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों से हर साल ऐसी खूबसूरत और हैरान करने वाली तस्वीरें सामने आती हैं, जो सोशल मीडिया पर आते ही छा जाती हैं। इस बार सूरजपुर की यह ‘मेंढक-मेंढकी की शादी’ इंटरनेट पर खूब तहलका मचा रही है।
