– शासकीय सुकर फार्म सकालो में मार्च से चल रहा था परीक्षण
अम्बिकापुर। भारत ने पशु चिकित्सा के क्षेत्र में ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। भोपाल स्थित राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशुरोग संस्थान के विज्ञानियों द्वारा तैयार अफ्रीकन स्वाइन फीवर की स्वदेशी वैक्सीन को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नईदिल्ली में आयोजित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के 98वें स्थापना दिवस समारोह में राष्ट्र को समर्पित किया। इस उपलब्धि में सरगुजा का भी अहम योगदान रहा, क्योंकि वैक्सीन का पहला सफल फील्ड ट्रायल शासकीय सुकर फार्म सकालो अम्बिकापुर में किया गया। यहां के सुअरों में इस टीके का उपयोग किया गया।
शासकीय सुकर फार्म सकालो के अतिरिक्त उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं डॉ सीके मिश्रा ने बताया कि मार्च 2026 से वैक्सीन का फील्ड ट्रायल प्रारंभ किया गया था। यह परीक्षण राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशुरोग संस्थान भोपाल के वैज्ञानियों डा राजू कुमार, डा सैन्थिल, डा वेंकटेश एवं फतेह सिंह की तकनीकी देखरेख में संचालित किया गया। ट्रायल के दौरान वैक्सीन के सुरक्षा मानकों और प्रतिरक्षण क्षमता का मूल्यांकन किया गया, जो पूरी तरह सफल रहा।
वैक्सीन की विशेषता
यह दुनिया की पहली एमए-104 कोशिका-आधारित जीवित क्षीणीकृत वैक्सीन है। इसे व्यावसायिक रूप से उपलब्ध सेल लाइन पर तैयार किया गया है, जिससे बड़े पैमाने पर कम लागत में उत्पादन संभव है। वैक्सीन की मात्र एक मिलीलीटर खुराक गर्दन की मांसपेशियों में दी जाती है, जिसके 14 दिन बाद बूस्टर डोज लगाई जाती है। यह आठ सप्ताह से अधिक आयु के स्वस्थ सुअरों के लिए अनुकूल है और छह महीने तक मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करती है। सबसे अहम बात यह है कि इसके उपयोग से वायरस के पुनः रोगजनक बनने का कोई खतरा नहीं पाया गया।
क्या है एसएफ, क्यों जरूरी थी वैक्सीन
वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ अजय अग्रवाल ने बताया कि अफ्रीकन स्वाइन फीवर सुअरों में होने वाला अत्यंत घातक वायरल रोग है। इसमें मृत्यु दर लगभग 100 प्रतिशत तक होती है और अब तक इसका कोई प्रभावी उपचार उपलब्ध नहीं था। भारत में 2020 में पहली बार इस बीमारी की पुष्टि हुई थी। तब से यह कई राज्यों में फैलकर सुअर पालकों के लिए बड़ा संकट बनी हुई थी। केवल बीमार पशुओं को मारने और सख्त जैव-सुरक्षा ही विकल्प थे।
आदिवासी बहुल अंचल को सीधा लाभ
पशु चिकित्सा विभाग के अतिरिक्त उप संचालक डॉ सीके मिश्रा ने कहा कि भारत में एएसएफ वैक्सीन का यह प्रथम फील्ड ट्रायल था जो सफल रहा। वर्तमान में विश्व के अधिकांश देशों में इस बीमारी की स्वीकृत व्यावसायिक वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। इस वैक्सीन के आने से भारत सहित दुनियाभर के सूकर पालकों को भारी आर्थिक नुकसान से राहत मिलेगी। सरगुजा जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्र, जहां सुअर पालन आजीविका का बड़ा साधन है, वहां के पशुपालकों को सीधा फायदा होगा।
