जांजगीर-चांपा। जिले के मुलमुला थाना क्षेत्र में गांजा जब्ती की एक कथित कार्रवाई ने पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। मंगलवार की रात हुई इस गोपनीय कार्रवाई को लेकर क्षेत्र में गंभीर चर्चाएं गर्म हैं। सूत्रों का दावा है कि पुलिस ने मौके पर एक स्विफ्ट कार को रोका था, जिसमें तीन संदिग्ध सवार थे। हालांकि, कागजों में दर्ज आधिकारिक जब्ती के दौरान यह चार पहिया वाहन अचानक गायब हो गया और उसकी जगह एक काले रंग की होंडा शाइन मोटरसाइकिल को बरामद दिखाया गया।
पुलिस ने इस पूरे मामले में केवल सोनसरी निवासी 37 वर्षीय संतराम यादव (पिता स्व. बनाराम यादव) को आरोपी बनाकर गांजा बरामदगी के आरोप में न्यायिक रिमांड पर जेल दाखिल करा दिया। बाकी दो संदिग्धों का कोई अता-पता नहीं है। स्थानीय गलियारों में दबी जुबान यह भी चर्चा तैर रही है कि कार्रवाई के दौरान करीब 3 लाख 50 हजार रुपये के कथित लेनदेन के बाद दो लोगों को छोड़ दिया गया और सारा मामला एक ही युवक के सिर मढ़ दिया गया। हालांकि, इन कथित आरोपों पर पुलिस विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक खंडन या बयान सामने नहीं आया है।
विभाग की कार्यशैली पर सबसे बड़ा सवाल 48 घंटे बीत जाने के बाद भी बना हुआ है। सामान्य तौर पर एक-दो पाव अवैध शराब या मामूली मात्रा में नशीला पदार्थ पकड़ने पर भी प्रेस नोट और तस्वीरों के साथ त्वरित प्रचार करने वाली पुलिस ने इस मामले में पूरी तरह चुप्पी साध रखी है। आरोपी को सलाखों के पीछे भेजे दो दिन गुजर चुके हैं, लेकिन पुलिस के अधिकृत मीडिया ग्रुप में इस कार्रवाई से जुड़ी एक पंक्ति की भी जानकारी साझा नहीं की गई है। इस रहस्यमयी खामोशी ने लेनदेन और मिलीभगत के संदेह को और गहरा कर दिया है।
