कोरिया। विकास के दावों और सरकारी निर्माण की हकीकत को बयां करती एक चौंकाने वाली तस्वीर छत्तीसगढ़ के कोरिया जिला मुख्यालय बैकुंठपुर से सामने आई है। यहाँ करीब 3 करोड़ 13 लाख रुपये की भारी-भरकम लागत से बना एक नया पुल महज दो दिनों की मूसलाधार बारिश भी झेल नहीं पाया। बारिश के बहाव में इस पुल का साइड शोल्डर और अप्रोच का एक बड़ा हिस्सा ताश के पत्तों की तरह बह गया। इतना ही नहीं, पुल के जॉइंट्स पर जगह-जगह खतरनाक और बड़े-बड़े गड्ढे उभर आए हैं, जो यहाँ से गुजरने वाले वाहन चालकों और राहगीरों के लिए किसी बड़े हादसे के खुले आमंत्रण जैसे हैं। भ्रष्टाचार और लापरवाही का इससे बड़ा उदाहरण क्या होगा कि करोड़ों का यह नया पुल जहाँ दो साल में ही जवाब देने लगा है, वहीं इसके ठीक बगल में स्थित अंग्रेजों के जमाने का बना पुराना पुल आज भी हर मौसम को मात देकर पूरी मजबूती के साथ सीना ताने खड़ा है।
इस बदहाली ने स्थानीय प्रशासन और निर्माण एजेंसी को पूरी तरह से कटघरे में खड़ा कर दिया है। स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों का कहना है कि जब इस पुल का निर्माण हो रहा था, तभी इसके घटिया डिजाइन और खराब गुणवत्ता को लेकर कई बार शिकायतें की गई थीं। पुल के दोनों तरफ सुरक्षित अप्रोच रोड बनाने और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग लगातार उठाई गई थी, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने अपनी आँखें मूंद रखी थीं। अधिकारियों की इसी अनदेखी का नतीजा है कि आज न तो इस पुल पर रोशनी (लाइट) की कोई व्यवस्था है और न ही राहगीरों को खतरे से आगाह करने के लिए कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया है।
इस पूरे निर्माण कार्य की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग के सेतु निगम के कंधों पर थी। पहली ही तेज बारिश ने विभाग के दावों की पोल खोलकर रख दी है, जिससे आक्रोशित स्थानीय नागरिकों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। जनता ने इस पूरे प्रोजेक्ट की किसी उच्च स्तरीय तकनीकी टीम से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। लोगों का साफ कहना है कि निर्माण में किए गए इस बड़े समझौते और जनता के पैसों की बर्बादी के लिए जिम्मेदार दोषी अधिकारियों और निर्माण एजेंसी (ठेकेदार) के खिलाफ तत्काल सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसे जानलेवा खिलवाड़ को रोका जा सके।
