अम्बिकापुर। छत्तीसगढ़ को देश का ‘बिजली सरप्लस’ राज्य कहा जाता है, जो दूसरे राज्यों को रोशन करने के बड़े-बड़े दावे करता है। लेकिन सरगुजा जिले के मुख्यालय अम्बिकापुर की जमीनी हकीकत इन दावों के मुंह पर करारा तमाचा है। यहाँ अफसरों के सुस्त रवैये, घोर लापरवाही और प्रशासनिक मनमानी ने पूरी बिजली व्यवस्था को तमाशा बनाकर रख दिया है। आलम यह है कि आसमान में हल्की सी हवा क्या चलती है और बूंद भर पानी क्या गिरता है, बिजली विभाग घुटने टेक देता है। शहर की बिजली घंटों के लिए इस कदर गुल हो जाती है, मानो कोई आदिम युग का दौर लौट आया हो। भीषण गर्मी और आसमान छूती उमस के बीच शहरवासी रातजगा करने को मजबूर हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद सो रहे हैं। जनता का आक्रोश अब सातवें आसमान पर पहुंच चुका है, क्योंकि मेंटेनेंस के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये फूंकने वाले इस विभाग की कलई जरा से मौसम के करवट लेते ही खुल जाती है।
बिजली कटौती का सबसे वीभत्स रूप शनिवार को शहर के बौरिपारा क्षेत्र में देखने को मिला, जहां लगातार 9 घंटे तक बिजली नदारद रही। इस भीषण और दमघोंटू माहौल में लोग घरों के बाहर निकल आए और विद्युत विभाग के खिलाफ जमकर अपनी नाराजगी जाहिर की। विभाग की लाचारी और बदइंतजामी का स्तर यह था कि देर रात जब कर्मचारी सुधार कार्य करने पहुंचे, तो उनके पास रोशनी तक की व्यवस्था नहीं थी; उन्हें कार की हेडलाइट के सहारे काम करना पड़ा। यह दृश्य खुद बयां करता है कि हाइटेक होने का दम भरने वाला विभाग अंदर से कितना खोखला हो चुका है। जनता का सीधा आरोप है कि जब भी ऐसी मुसीबत आती है, बिजली दफ्तर के फोन रिसीव नहीं किए जाते और अधिकारी-कर्मचारी शिकायतों को अनसुना कर देते हैं। हर साल मानसून से पहले मेंटेनेंस के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति की जाती है, जिसका खामियाजा आज टैक्स भरने वाली आम जनता भुगत रही है।

यह बदहाली सिर्फ एक दिन की नहीं है, बल्कि शुक्रवार की रात भी कोतवाली थाने के पीछे स्थित विद्युत विभाग के कार्यालय में पीड़ित नागरिकों की भारी भीड़ जमा हो गई थी। शुक्रवार को भी हल्की हवा-आंधी के बीच तीन घंटे से अधिक समय तक बत्ती गुल रही, जिससे परेशान होकर गुस्साए लोग सीधे दफ्तर आ धमके और जमकर खरी-खोटी सुनाई। लोगों का साफ कहना है कि जब अभी गर्मी के मौसम में यह हाल है, तो आगामी बरसात के दिनों में बिजली विभाग शहर को किस नरक में धकेलेगा, इसकी कल्पना करके ही रूह कांप जाती है। अधिकारियों की इस अकर्मण्यता और शून्य मॉनिटरिंग ने जनता का जीना मुहाल कर दिया है।
सबसे बड़ा और गंभीर सवाल सीधे सूबे के मुखिया और शासन-प्रशासन की नीयत पर उठता है। छत्तीसगढ़ का ऊर्जा विभाग खुद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के पास है, लेकिन उनके अपने ही विभाग के जमीनी हालात पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं। साय सरकार के राज में अफसरशाही इस कदर निरंकुश और सुस्त हो चुकी है कि उन्हें जनता की तकलीफों से कोई सरोकार नहीं रह गया है। जब संभाग के मुख्य शहर अम्बिकापुर के दिल में यह दुर्दशा है, तो दूर-दराज के गांवों और वनांचलों की क्या स्थिति होगी, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। बिजली विभाग के आला अधिकारी एसी कमरों में बैठकर कैसी मॉनिटरिंग कर रहे हैं कि मामूली तकनीकी दिक्कतों को दूर करने में पूरा दिन लग जाता है? सक्रियता और जवाबदेही के नाम पर शून्य हो चुके इस महकमे और गूंगे-बहरे प्रशासन की नींद आखिर कब खुलेगी, और मुख्यमंत्री का यह विभाग कब वास्तव में ‘ऊर्जावान’ होकर जनता को इस नारकीय व्यवस्था से मुक्ति दिलाएगा, इसका जवाब पूरा अम्बिकापुर मांग रहा है।
