बीजापुर। छत्तीसगढ़ के वन मंत्री केदार कश्यप पर रायपुर में अपनी पत्नी की कंपनी को नियमों की अनदेखी कर करोड़ों रुपये का बेशकीमती प्लॉट दिलाने के गंभीर आरोप लगे हैं। बीजापुर से कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी ने शुक्रवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इस पूरे मामले को ‘सत्ता का दोहरा चेहरा’ करार दिया। मंडावी ने मुख्यमंत्री से इस भूमि आवंटन को तत्काल निरस्त करने, पूरे प्रकरण की स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच कराने और वन मंत्री केदार कश्यप से अविलंब इस्तीफा लेने की मांग की है।
विधायक मंडावी के अनुसार, मंत्री केदार कश्यप की पत्नी जिस ‘राधिका पैलेस प्राइवेट लिमिटेड’ कंपनी में निदेशक हैं, उसकी रायपुर के कचना-नालापारा में करीब 1.33 एकड़ कम कीमत और संकरे मार्ग वाली जमीन स्थित है। आरोप है कि इसके बदले रायपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) द्वारा सड्डू के एमआर-43 मार्ग पर प्राइम लोकेशन वाला प्लॉट नंबर 25 आवंटित किया जा रहा है। लगभग 2,168 वर्गमीटर के इस नए भूखंड का अनुमानित बाजार मूल्य करीब 20 करोड़ रुपये आंका जा रहा है। मंडावी ने आरडीए की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो नियम आम गरीब नागरिकों पर सख्ती से लागू होते हैं, वे मंत्री और रसूखदारों के लिए कैसे बदल दिए जाते हैं?
बस्तर की वर्तमान स्थिति का हवाला देते हुए विधायक ने तीखा हमला बोला और कहा कि 17 साल 9 महीने मंत्री पद पर रहकर क्षेत्र में विकास का दावा करने वाले केदार कश्यप आदिवासियों के हक पर मौन साधे हुए हैं। एक तरफ बस्तर के मूल निवासी अपनी पैतृक, निस्तार और वन भूमि को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और सरकार आंखें मूंदे बैठी है, वहीं दूसरी तरफ वन मंत्री अपने परिवार की निजी कंपनी को राजधानी में 20 करोड़ रुपये का प्लॉट दिलाने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ग्राम सभाओं की सहमति कागजों तक सीमित रह गई है और यह घटनाक्रम सत्ता के दुरुपयोग का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
